किसी की दुनिया में अंधेरा हो और उसे रोशनी मिल जाए…किसी की आंखों में वर्षों से ठहरे सपनों को फिर से रंग मिल जाए…
और किसी अनजान चेहरे पर सिर्फ इसलिए मुस्कान लौट आए, क्योंकि किसी ने अपने जाने के बाद भी उसकी दुनिया रोशन करने का फैसला लिया था।
नेत्रदान इसी मानवीय संवेदना का नाम है।
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत धमतरी जिला प्रशासन ने इसी भावना को आत्मसात करते हुए एक प्रेरक पहल की है। समय-सीमा की बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री जयंत नाहटा, अपर कलेक्टर श्रीमती इंदिरा देवहारी, नगर निगम आयुक्त श्री अरुण वर्मा, संयुक्त कलेक्टर डॉ. कल्पना ध्रुव, एसडीएम श्री पीयूष तिवारी सहित जिला स्तरीय अधिकारियों ने एक साथ नेत्रदान का संकल्प लिया और नेत्रदान सहमति पत्र भरे।
यह सिर्फ कागज पर दर्ज एक सहमति नहीं थी। यह जीवन के बाद भी किसी के जीवन में बने रहने की इच्छा थी। यह उस अनजान व्यक्ति के लिए एक ऐसा उपहार था, जिसे शायद कभी इन अधिकारियों से मिलने का अवसर भी न मिले, लेकिन उनकी आंखों से दुनिया देखने का अवसर मिल सकता है।
‘हमारी आंखें किसी की सुबह बनें’
इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत श्री जयंत नाहटा ने कहा कि नेत्रदान अत्यंत पुनीत और मानवीय कार्य है। व्यक्ति के जीवन के बाद उसकी आंखें किसी दूसरे व्यक्ति की दुनिया को रोशन करने का माध्यम बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि हमारा छोटा-सा संकल्प किसी ऐसे व्यक्ति के जीवन में उजाला ला सकता है, जो दुनिया को देखने की इच्छा रखता है।
उन्होंने अधिकारियों से आह्वान करते हुए कहा, “हम सब मिलकर नेत्रदान का संकल्प लें और किसी के जीवन में रोशनी लौटाने का माध्यम बनें। इससे बड़ा मानव सेवा का कार्य और क्या हो सकता है।”
उनके शब्दों में केवल अपील नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी की वह भावना थी, जो एक छोटे से संकल्प को बड़े सामाजिक संदेश में बदल देती है।
एक संकल्प, जो मृत्यु के बाद भी जीवन से जुड़ा रहेगा
जीवन का अंत होना प्रकृति का नियम है, लेकिन किसी के जाने के बाद भी उसकी आंखों से किसी दूसरे की दुनिया रोशन हो—यह विचार अपने आप में बेहद भावुक कर देने वाला है।
नेत्रदान का संकल्प इसी विचार को साकार करता है। जिस व्यक्ति ने जीवनभर दुनिया को देखा, उसके जाने के बाद उसकी आंखें किसी ऐसे व्यक्ति के लिए उम्मीद बन सकती हैं, जिसके लिए दुनिया केवल अंधेरे का नाम बन चुकी है।
यही कारण है कि जिला प्रशासन की इस पहल को केवल एक प्रशासनिक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व के जीवंत उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
अधिकारियों ने पहले स्वयं कदम बढ़ाया, अब समाज से जुड़ने की अपील
अक्सर किसी सामाजिक अभियान की सफलता केवल अपील करने से नहीं, बल्कि स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करने से होती है। धमतरी जिला प्रशासन के अधिकारियों ने नेत्रदान के लिए सहमति देकर इसी भावना को सामने रखा है।
अधिकारियों का यह सामूहिक संकल्प आम नागरिकों के लिए भी प्रेरणा का संदेश है कि समाज में बदलाव की शुरुआत स्वयं से की जा सकती है। एक व्यक्ति का निर्णय परिवार को प्रेरित कर सकता है, परिवार का संकल्प समाज तक पहुंच सकता है और समाज की सामूहिक संवेदना किसी बड़ी मानवीय पहल का रूप ले सकती है।
सेवा संकल्प से ‘रोशनी का संकल्प’ तक
सेवा संकल्प अभियान का मूल भाव ही समाज के प्रति सेवा, संवेदना और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है। इसी क्रम में नेत्रदान की यह पहल अभियान को एक नई मानवीय ऊंचाई देती है।
यह संकल्प हमें याद दिलाता है कि सेवा केवल जीवन रहते ही नहीं की जाती। जीवन के बाद भी हमारा एक निर्णय किसी दूसरे के जीवन में उम्मीद, उजाला और नई शुरुआत ला सकता है।
धमतरी में जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा लिया गया यह सामूहिक संकल्प समाज के लिए एक मौन संदेश है
“हम चले जाएं, लेकिन हमारी आंखों से किसी की दुनिया उजली रह जाए।”यही है सेवा का सबसे सुंदर रूप।यही है मानवता का सबसे उजला संकल्प।
और शायद यही वह रोशनी है, जो एक जीवन के बाद भी दूसरे जीवन तक पहुंचती रहती है।




