ग्रामीण जनता से अवैध वसूली, अनधिकृत दखल और दबाव की शिकायतों से पंजीयन व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल*
(अकील मेमन)
राजनांदगांव जिले के छुरिया स्थित पंजीयन कार्यालय को लेकर इन दिनों क्षेत्र में लगातार शिकायतें और चर्चाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय नागरिकों, ग्रामीण किसानों एवं दस्तावेज़ लेखकों के अनुसार, कार्यालय के बाहर कुछ कथित दलाल सक्रिय हैं और उनका प्रभाव इतना बढ़ गया है कि कई लोग यह महसूस करते हैं कि बिना उनके हस्तक्षेप के पंजीयन संबंधी कार्य आसानी से नहीं हो पाते। यदि ऐसी शिकायतों में तथ्य हैं, तो यह केवल एक कार्यालय की व्यवस्था का प्रश्न नहीं, बल्कि पूरी पंजीयन व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
*कथित अनधिकृत दखल और दबाव की चर्चाएं*
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र का एक कथित दलाल लंबे समय से पंजीयन कार्यालय के आसपास सक्रिय है। शिकायतों के अनुसार उसे कार्यालय के भीतर तक पहुंच प्राप्त रहती है तथा वह दस्तावेज़ों और फाइलों के कार्य में अनधिकृत हस्तक्षेप करता है। कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि आपत्ति करने वालों पर प्रभाव और दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है तथा अन्य दस्तावेज़ लेखक (अर्ज़ीनवीस) भी असहज माहौल महसूस करते हैं।
इन शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है, लेकिन लगातार उठ रहे ऐसे सवाल प्रशासनिक व्यवस्था पर चिंता अवश्य पैदा करते हैं।
*जिले के मुखिया के रूप में कलेक्टर की भूमिका पर उठते सवाल*
जिला कलेक्टर जिले के प्रशासनिक एवं राजस्व तंत्र के सर्वोच्च अधिकारी होते हैं। ऐसे में यदि किसी शासकीय कार्यालय के बाहर लंबे समय से कथित दलाली, अनधिकृत हस्तक्षेप अथवा आम नागरिकों के शोषण जैसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो लोगों की स्वाभाविक अपेक्षा रहती है कि जिला प्रशासन इसका संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराए। क्षेत्र में यह चर्चा है कि यदि शिकायतें वास्तविक हैं तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए और यदि शिकायतें निराधार हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट कर आम जनता के सामने तथ्य रखे जाने चाहिए। आम लोगों की निगाहें अब जिला कलेक्टर की भूमिका और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
*पंजीयन व्यवस्था पर सवाल, कर्मचारी भी कथित तौर पर परेशान होने की चर्चा*
लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच पंजीयन कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि रजिस्ट्रार कार्यालय के कुछ कर्मचारी भी कथित रूप से उक्त दलाल के व्यवहार से असहज और परेशान रहते हैं। चर्चा है कि वह अपनी कथित पहुंच और प्रभाव का हवाला देकर अधिकारियों, कर्मचारियों तथा अन्य लोगों पर दबाव बनाने और धमकाने का प्रयास करता है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है, लेकिन यदि जांच में ऐसे तथ्य सामने आते हैं, तो यह अत्यंत गंभीर प्रशासनिक विषय होगा और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को और मजबूत करेगा।
*सबसे अधिक प्रभावित गरीब किसान और ग्रामीण नागरिक*
भूमि की रजिस्ट्री कराने आने वाले गरीब किसान, मजदूर, बुजुर्ग एवं अशिक्षित नागरिक सबसे अधिक परेशान बताए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि कई बार उन्हें अनावश्यक रूप से कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं और इससे समय, धन तथा श्रम—तीनों की हानि होती है। ग्रामीणों के बीच यह भावना भी सुनने को मिलती है कि सरकारी प्रक्रिया जितनी सरल होनी चाहिए, व्यवहार में उतनी सहज दिखाई नहीं देती।
*भाजपा सरकार और स्थानीय नेताओं की चुप्पी भी चर्चा का विषय*
क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि स्थानीय भाजपा नेताओं को इन शिकायतों और जनचर्चाओं की जानकारी होने के बावजूद इस विषय पर कोई स्पष्ट सार्वजनिक पहल या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बाद भी इस मुद्दे पर दिखाई दे रही चुप्पी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
*आम जनता चाहती है निष्पक्ष जांच और दलाल-मुक्त व्यवस्था*
आम जनता चाहती है कि जिला कलेक्टर स्वयं पूरे मामले का संज्ञान लेकर छुरिया पंजीयन कार्यालय की कार्यप्रणाली, कार्यालय परिसर के बाहर सक्रिय कथित दलालों की भूमिका तथा पंजीयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के अनधिकृत हस्तक्षेप की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराएं। यदि जांच में किसी भी व्यक्ति, कर्मचारी अथवा अन्य संबंधित पक्ष की भूमिका सामने आती है, तो उसके विरुद्ध विधिसम्मत एवं कठोर कार्रवाई की जाए।
लोगों का मानना है कि सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता, जवाबदेही और दलाल-मुक्त व्यवस्था स्थापित करना सुशासन की मूल कसौटी है। यदि व्यवस्था पूरी तरह नियमों के अनुसार संचालित हो रही है, तो निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा, और यदि कहीं अनियमितता है, तो उस पर समयबद्ध कार्रवाई से आम जनता का प्रशासन पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।




