(अकील मेमन की कलम से)
राजनांदगांव। प्रशासनिक सेवाओं में स्थानांतरण एक सामान्य प्रक्रिया है। किसी अधिकारी के तबादले पर कहीं नई जिम्मेदारी मिलने की खुशी होती है तो कहीं उसके जाने की चर्चा और भावनाएं जुड़ जाती हैं। हर स्थानांतरण के अपने-अपने मायने होते हैं। लेकिन जब कोई अधिकारी जनता के बीच रहकर, जनता के लिए और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य करता है, तब उसका स्थानांतरण केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं रह जाता, बल्कि लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाता है।



जिला पंचायत राजनांदगांव की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री सुरुचि सिंह (आईएएस, 2020 बैच) का नगर पालिका निगम भिलाई के आयुक्त पद पर स्थानांतरण किए जाने के आदेश के बाद पूरे जिले में उनके कार्यकाल और विकास कार्यों को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। पंचायत प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, अधिकारियों तथा ग्रामीणों के बीच उनके योगदान को याद किया जा रहा है।
इससे पूर्व बेमेतरा जिले में एसडीएम के रूप में अपनी कार्यकुशलता और संवेदनशील प्रशासनिक कार्यशैली से पहचान बनाने वाली सुश्री सुरुचि सिंह ने 9 फरवरी 2024 को जिला पंचायत राजनांदगांव के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का पदभार ग्रहण किया। पदभार संभालने के बाद उन्होंने प्रशासन को केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सुदूर वनांचल एवं ग्रामीण क्षेत्रों का लगातार भ्रमण किया। चौपालों के माध्यम से ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित किया, उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उनकी कार्यशैली का मूल उद्देश्य यही रहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
उनके नेतृत्व में मनरेगा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, पंचायत विकास तथा महिला स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य हुए। हजारों ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं आजीविका के अवसर मिले तथा महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में प्रभावी पहल की गई।
विशेष रूप से जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन के क्षेत्र में उनके कार्यकाल को महत्वपूर्ण माना जाता है। अमृत सरोवर, तालाबों का जीर्णोद्धार, गेबियन संरचनाएं, चेकडैम, परकोलेशन टैंक, रिचार्ज संरचनाएं तथा वर्षा जल संचयन जैसे कार्यों को मिशन मोड में आगे बढ़ाया गया। परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में भू-जल स्तर में सुधार हुआ, पेयजल संकट में कमी आई और जल संरक्षण जनभागीदारी का अभियान बना। इन्हीं प्रयासों के फलस्वरूप राजनांदगांव को राष्ट्रीय जल पुरस्कार सहित विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां प्राप्त हुईं और जिले ने पूरे देश में अपनी अलग पहचान बनाई।
कृषि क्षेत्र में फसल चक्र परिवर्तन को बढ़ावा देकर किसानों को कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों की ओर प्रेरित किया गया। इससे जल संरक्षण के साथ-साथ कृषि की स्थिरता और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। वहीं ग्रामीण बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए “पढ़ लाइका” जैसी अभिनव पहल को भी प्रोत्साहित किया गया। कुपोषण मुक्ति, स्वच्छता, शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी जैसे विषयों पर भी लगातार कार्य किए गए।
सुश्री सुरुचि सिंह की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सहज उपलब्धता, पारदर्शिता और जनसरोकार रही। वे जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों और आम नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुनती थीं तथा समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने का प्रयास करती थीं। विकास कार्यों की सतत मॉनिटरिंग, पारदर्शी प्रशासन और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए उनके प्रयासों की सराहना की जाती रही। उनके नेतृत्व में हुए अनेक नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली तथा उन्हें नई दिल्ली में सम्मानित किया गया।
स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद जिले में यह चर्चा भी है कि उनके नेतृत्व में शुरू हुए अनेक विकास कार्य, जल संरक्षण अभियान, आजीविका संवर्धन की योजनाएं और पंचायतों में किए गए नवाचार अभी निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में विभिन्न वर्गों के लोगों की अपेक्षा है कि इन विकास कार्यों की गति और निरंतरता बनी रहे।
कटु सत्य यही है कि प्रशासनिक सेवा में कोई भी अधिकारी स्थायी नहीं होता। जो आज किसी जिले में है, उसे आज नहीं तो कल स्थानांतरित होकर जाना ही होता है। लेकिन किसी अधिकारी की वास्तविक पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उन कार्यों से होती है जो वह अपने पीछे छोड़ जाता है। पद बदल जाते हैं, नाम बदल जाते हैं, लेकिन अच्छे कार्य वर्षों तक लोगों की स्मृतियों में जीवित रहते हैं।
राजनांदगांव में भी सुश्री सुरुचि सिंह के कार्यकाल की पहचान केवल प्रशासनिक निर्णयों तक सीमित नहीं रही। कुपोषण से बाहर आए बच्चों के चेहरे की मुस्कान, जल संरक्षण के माध्यम से पेयजल संकट से राहत पाते गांव, स्वच्छता के क्षेत्र में किए गए प्रयास, हजारों महिलाओं को आजीविका से जोड़ने वाली पहल, फसल चक्र परिवर्तन के प्रति बढ़ती जागरूकता, मजबूत होती ग्राम पंचायतें और विकास कार्यों में लाई गई पारदर्शिता—ये ऐसे कार्य हैं जिन्हें केवल वर्तमान ही नहीं, बल्कि आने वाला समय भी याद रखेगा।
अंततः किसी अधिकारी की सबसे बड़ी उपलब्धि यही होती है कि उसके जाने के बाद भी उसके कार्य बोलते रहें। यदि जनता किसी अधिकारी को उसके पद के कारण नहीं, बल्कि उसके कार्यों के कारण याद रखे, तो वही उसके प्रशासनिक जीवन की सबसे बड़ी सफलता होती है।
फिलहाल सुश्री सुरुचि सिंह का स्थानांतरण जिला पंचायत राजनांदगांव से नगर पालिका निगम भिलाई के आयुक्त पद पर किया गया है। हालांकि वे अभी कार्यमुक्त नहीं हुई हैं और जिला पंचायत राजनांदगांव के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं। उनके कार्यमुक्त होने के बाद वे भिलाई नगर निगम में आयुक्त का पदभार ग्रहण करेंगी।
राजनांदगांव में आज चर्चा केवल एक स्थानांतरण आदेश की नहीं है, बल्कि उस कार्यशैली की है जिसने प्रशासन को गांव की चौखट तक पहुंचाया, योजनाओं को धरातल पर उतारा और विकास को जनभागीदारी का स्वरूप दिया। यही कारण है कि सुश्री सुरुचि सिंह का नाम आज राजनांदगांव के उन चुनिंदा अधिकारियों में शुमार किया जा रहा है, जिन्होंने अपने कार्यों से जनता के दिलों में एक अलग स्थान बनाया।




