ब्रुसेल्स। यूरोपीय संघ (EU) रूस के खिलाफ अपने 21वें प्रतिबंध पैकेज को लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित पैकेज के तहत करीब 50 कंपनियों पर नए निर्यात नियंत्रण प्रतिबंध लगाए जाने का प्रस्ताव है। इनमें भारत सहित कई देशों की कंपनियां भी शामिल हैं। इस कदम का उद्देश्य उन संस्थाओं पर कार्रवाई करना है, जिन पर रूस के सैन्य और औद्योगिक ढांचे को अप्रत्यक्ष सहायता देने तथा मौजूदा प्रतिबंधों को दरकिनार करने में मदद करने का आरोप है।
हालांकि, इस प्रतिबंध पैकेज को लागू करने से पहले यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों की मंजूरी आवश्यक होगी।
इन देशों की कंपनियां आ सकती हैं दायरे में
यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि Kaja Kallas के अनुसार, नए प्रस्ताव में कई देशों में स्थित कंपनियों को निर्यात-नियंत्रण उपायों के दायरे में लाया गया है। इनमें भारत, चीन, तुर्किये, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
इसके अलावा रूस के ड्रोन निर्माण क्षेत्र से जुड़े 30 से अधिक नए नामों को भी प्रतिबंध सूची में शामिल करने की योजना बनाई गई है।
रूसी तेल और LNG कारोबार पर भी सख्ती
प्रस्तावित पैकेज में रूस के तेल और एलएनजी कारोबार पर अतिरिक्त दबाव बनाने की रणनीति भी शामिल है। वर्तमान में प्रतिबंधित जहाजों की सूची में 30 और जहाज जोड़े जाने का प्रस्ताव है।
इसके साथ ही पहली बार उन जहाजों को भी निशाना बनाने की तैयारी है, जो रूस के तथाकथित “शैडो फ्लीट” को ईंधन या अन्य सहायक सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। रूसी तेल के व्यापार और प्रसंस्करण से जुड़े बंदरगाहों, हवाई अड्डों और रिफाइनरियों पर भी नए प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।
यूरोपीय संघ रूस को लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टैंकरों की बिक्री पर भी रोक लगाने की योजना बना रहा है।
भारत पर क्या पड़ सकता है असर?
भारत बीते कुछ वर्षों में रूस से कच्चे तेल का बड़ा आयातक बनकर उभरा है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद भारत और चीन ने रूस से तेल खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नए प्रतिबंध लागू होते हैं तो रूस से तेल आपूर्ति करने वाले कुछ टैंकर प्रभावित हो सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, इन प्रस्तावों के अंतिम स्वरूप और उनके वास्तविक प्रभाव का आकलन प्रतिबंधों के लागू होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
बैंकों और क्रिप्टो ऑपरेटरों पर भी नजर
नए प्रतिबंध पैकेज में उन संस्थानों पर भी कार्रवाई का प्रस्ताव है, जिनका उपयोग रूस कथित तौर पर राजस्व जुटाने और प्रतिबंधों से बचने के लिए कर रहा है। इसके तहत तीसरे देशों में संचालित कुछ बैंकों, हथियार निर्माताओं, तेल कारोबारियों, रिफाइनरियों और क्रिप्टोकरेंसी ऑपरेटरों को भी निशाने पर लिया जा सकता है।
यूरोपीय संघ का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और प्रतिबंधों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है।





