डीजल की बढ़ती कीमतों से बस संचालक परेशान, किराया बढ़ाने की मांग… रोज सफर करने वाले मजदूर, छात्र और नौकरीपेशा लोगों की बढ़ी चिंता
रायपुर।
महंगाई ने अब आम आदमी की जिंदगी को हर मोर्चे पर मुश्किल बनाना शुरू कर दिया है। पहले रसोई का बजट बिगड़ा, फिर रोजमर्रा की जरूरतों के दाम बढ़े और अब सार्वजनिक परिवहन भी महंगा होने की कगार पर पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ में बस किराए में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की मांग ने लाखों यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है।
प्रदेश के बस संचालकों का कहना है कि लगातार बढ़ती डीजल कीमतों के बीच पुराने किराए पर बस संचालन करना अब लगभग असंभव होता जा रहा है। बीते कुछ दिनों में डीजल के दाम करीब 8 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं। इसके अलावा वाहन रखरखाव, टैक्स, स्पेयर पार्ट्स, बीमा और कर्मचारियों के खर्च में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में बस संचालकों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
हालांकि इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर उन आम लोगों पर पड़ेगा, जो रोजाना बसों में सफर करते हैं। गांवों और छोटे शहरों से नौकरी, मजदूरी, पढ़ाई और व्यापार के लिए आने-जाने वाले लोग पहले से ही बढ़ती महंगाई से परेशान हैं। बस किराया बढ़ने से उनके मासिक बजट पर सीधा असर पड़ेगा। रोज 20-30 रुपये बचाने की जद्दोजहद करने वाले मजदूर, छात्र, महिलाएं और नौकरीपेशा लोग अब अतिरिक्त खर्च के दबाव में आ जाएंगे।
यातायात महासंघ ने परिवहन मंत्री केदार कश्यप से मुलाकात कर साफ कहा है कि यदि किराए में संशोधन नहीं किया गया तो कई रूटों पर बस संचालन प्रभावित हो सकता है। यानी एक तरफ बस संचालकों की मजबूरी है तो दूसरी तरफ आम जनता की परेशानी।
केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में की गई बढ़ोतरी ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। ईंधन महंगा होने का असर केवल यात्रा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खाद्य सामग्री और जरूरी सामानों की ढुलाई भी महंगी हो जाती है, जिसका सीधा बोझ आखिरकार आम जनता पर ही पड़ता है।
अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच आखिर आम आदमी राहत की उम्मीद किससे करे? क्योंकि हर बार बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा असर उसी वर्ग पर पड़ता है, जो पहले से ही सीमित आय में अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए संघर्ष कर रहा है।




