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अमेरिका का बड़ा एक्शन, चीन की रिफाइनरी पर लगाया प्रतिबंध

ईरान से जुड़े तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के खिलाफ सख्त एक्शन लिया है। अमेरिका ने चीन में स्थित एक रिफाइनरी और ईरान के तेल कारोबार से जुड़े कई जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसका मकसद ईरान की तेल से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ाना है।

अमेरिका के ट्रेजरी विभाग के अनुसार, ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ (OFAC) ने ‘हेंगली पेट्रोकेमिकल (डालियान) रिफाइनरी कंपनी लिमिटेड’ पर कार्रवाई की है। विभाग का कहना है कि यह कंपनी ईरान से कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाली बड़ी कंपनियों में शामिल है।

ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा, “आर्थिक सख्ती ईरानी शासन पर वित्तीय शिकंजा कस रही है, मध्य पूर्व में उसकी आक्रामकता को रोक रही है और उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर अंकुश लगाने में मदद कर रही है।”

इस कार्रवाई के तहत करीब 40 शिपिंग कंपनियों और जहाजों को भी निशाने पर लिया गया है, जिन्हें ईरान के तथाकथित “शैडो फ्लीट” का हिस्सा माना जाता है। अमेरिका का कहना है कि ये जहाज तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों को दुनिया भर में पहुंचाते हैं, जिससे ईरानी सरकार को पैसा मिलता है।

स्कॉट बेसेंट ने यह भी कहा कि “डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिका आगे भी उन जहाजों, बिचौलियों और खरीदारों पर कार्रवाई करता रहेगा, जो ईरान का तेल दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने में मदद करते हैं।” उन्होंने साफ चेतावनी दी कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति या जहाज को अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।

ट्रेजरी अधिकारियों के मुताबिक, चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियां, जिन्हें “टीपॉट्स” कहा जाता है, ईरान के कच्चे तेल की बड़ी खरीदार हैं। इनमें हेंगली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बताई गई है, जिसने ईरान से अरबों डॉलर का तेल खरीदा है। बयान में कहा गया है कि हेंगली ने ‘सेपेहर एनर्जी जहान नामा पार्स कंपनी’ के जरिए प्रतिबंधित जहाजों और ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ से जुड़े शिपमेंट प्राप्त किए, जिससे ईरानी सेना के लिए करोड़ों डॉलर का राजस्व उत्पन्न हुआ है।

इसके अलावा अमेरिका ने 19 और जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। इन पर आरोप है कि ये जहाज ईरान का कच्चा तेल, एलपीजी और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पाद विभिन्न देशों तक पहुंचा रहे थे।

क्या होता है अमेरिकी प्रतिबंध?
ट्रेजरी विभाग के अनुसार, फरवरी 2025 से अब तक ईरान से जुड़े 1,000 से ज्यादा व्यक्तियों, संस्थाओं, जहाजों और विमानों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। अमेरिकी कानून के तहत जिन पर प्रतिबंध लगता है, उनकी अमेरिका में मौजूद संपत्ति फ्रीज कर दी जाती है और अमेरिकी नागरिकों के लिए उनके साथ लेन-देन करना आमतौर पर प्रतिबंधित होता है। साथ ही, ऐसी गतिविधियों में मदद करने वाली विदेशी कंपनियों को भी सजा का सामना करना पड़ सकता है।

 

 

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