कलेक्टर से तीन बिंदुओं में शिकायत कर कार्रवाई की मांग
कागजों में भूखंडों का भौतिक सत्यापन जमीनों की रजिस्ट्री पर हर स्तर पर गड़बड़ी
बेमेतरा-
स्थानीय उप पंजीयक कार्यालय (रजिस्ट्री ऑफिस) में इन दिनों नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस संबंध में शहर की मां कालिका सेवा समिति के पदाधिकारी ने कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई से तीन बिंदुओं में शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत पर जिला पंजीयक की ओर से जांच टीम गठित की गई है। शिकायतकर्ताओं ने नियमों को ताक पर रखकर की गई रजिस्ट्री से शासन को बड़े राजस्व की हानि होना बताया है। यहां भू-माफिया, बिचौलिए और विभाग के अधिकारियों की कथित मिलीभगत से यह खेल चल रहा है । शिकायत के अनुसार सिंचित भूमि को असिंचित दिखाकर, छोटे भूखंडो और महंगे वार्डों की जमीनों को कम दर वाले वार्डों के नाम पर रजिस्ट्री करने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
सिंचित भूमि को असिंचित बताकर राजस्व की चोरी
बेमेतरा क्षेत्र में जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं। नियमों के मुताबिक, सिंचित भूमि की गाइडलाइन दरें असिंचित भूमि के मुकाबले काफी अधिक होती हैं। लेकिन उप पंजीयक कार्यालय में कागजों की बाजीगरी ऐसी है कि उपजाऊ और सिंचित जमीनों को असिंचित दर्शाया जा रहा है। ऐसा करने से जमीन की कीमत कागजों पर गिर जाती है, जिससे रजिस्ट्री शुल्क और स्टाम्प ड्यूटी कम चुकानी पड़ती है। इस प्रक्रिया में सरकार को मिलने वाले लाखों रुपये के टैक्स की चोरी की जा रही है, जबकि हकीकत में वे जमीनें पूरी तरह सिंचित और कीमती हैं।
नियम ताक पर: छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री
शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि अवैध कॉलोनियों और छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और स्थानीय निकाय की अनुमति अनिवार्य है। यहां इस नियम को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। नियमानुसार अनुसार 5 डिसमिल या इससे अधिक भूमि की रजिस्ट्री रही है, लेकिन स्थानीय पंजीयन कार्यालय में दो से तीन डिसमिल भूमि की भी रजिस्ट्री हो रही है। छोटे टुकड़ों की रजिस्ट्री बिना डायवर्सन और ले-आउट पास कराए नहीं की जा सकती।
वार्ड शिफ्टिंग’ का बड़ा खेल: लोकेशन बदलकर धोखाधड़ी
शहर में शातिराना अंदाज में वार्ड में भूमि की रजिस्ट्री में खेल किया जा रहा है। शहर के कुछ वार्ड मुख्य सड़क के किनारे या व्यापारिक केंद्र में होने के कारण हाई वैल्यू (ज्यादा दर) वाले हैं। वहीं, कुछ वार्ड शहर के बाहरी हिस्सों में होने के कारण लो वैल्यू वाले हैं। महंगे वार्ड की जमीन को दस्तावेजों में पड़ोस के कम दर वाले वार्ड का हिस्सा बता दिया जाता है।
इस हेराफेरी से जमीन मालिक और माफिया को तो फायदा हो रहा है, लेकिन सरकारी खजाना खाली हो रहा है।
प्रशासनिक मौन पर उठते सवाल
इस पूरे मामले में उप पंजीयक कार्यालय की भूमिका सबसे अधिक संदिग्ध है। बिना भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों की गहन जांच के ऐसी रजिस्ट्री होना नामुमकिन है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कार्यालय में सक्रिय बिचौलियों का एक बड़ा नेटवर्क है, जो अधिकारियों के साथ मिलकर इन डील्स को फाइनल करता है।
जमीन की 50 मीटर की दूरी की रजिस्ट्री पर बड़ा खेल
स्थानीय स्तर पर मुख्य मार्ग से जमीन की 50 मीटर की दूरी पर भी खेल किया जा रहा है। उल्लेखनीय है की मुख्य मार्ग से जमीन की 50 मीटर की दूरी तक और इसके बाद जमीन के दर से 25% रहता है। यहां भौतिक सत्यापन किए बिना मिलीभगत का मुख्य मार्ग से लगी जमीनों को 50 मीटर के बाद दिखाकर रजिस्ट्री की जा रही है। इस खेल में शासन को बड़े राजस्व की हानि हो रही है। यहां संबंधित विभाग के अधिकारी अपने उच्च अधिकारियों को पैसा देने का हवाला देकर वसूली करते है।
पक्के मकान को जमीन बताकर कर रहे रजिस्ट्री
जमीनो की रजिस्ट्री में बड़ा खेल सामने आया है। जहां पक्के मकानों को भूखंड बताकर रजिस्ट्री कराई जा रही है। यह भौतिक सत्यापन का अभाव है या मिलीभगत का खेल जांच का विषय है। जमीन व पक्के मकान रजिस्ट्री की दर में बड़ा अंतर रहता है।
वर्सन
इस संबंध में शिकायत मिला है, जांच के लिए टीम गठित की गई है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
संतूलाल नेताम – जिला पंजीयक बेमेतरा




