बगलामुखी जयंती हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बगलामुखी जयंती मनाई जाती है। इस दिन दस महाविद्याओं में शामिल आठवीं देवी मां बग्लामुखी का प्राकट्य माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से मां बगलामुखी की उपासना की जाती है। मान्यता है कि मां बगलामुखी की उपासना से शत्रुओं पर विजय मिलती है, रोग और भय दूर होते हैं तथा जीवन की परेशानियों से राहत मिलती है।
तंत्रशास्त्र के अनुसार, मां बगलामुखी की उपासना से रोग दूर होते हैं। महामारी का भय नहीं रहता और शत्रुओं से छुटकारा मिलता है। इसके अलावा मां बगलामुखी की उपासना से भय और चिंता भी दूर रहती है।
कब है बगलामुखी जयंती 2026
दृक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 23 अप्रैल 2026 को रात 8 बजकर 49 मिनट से शुरू होगी और 24 अप्रैल को शाम 7 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार इस वर्ष बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।
पूजा विधि
बगलामुखी जयंती के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि दैनिक कार्य पूरे करें।
हाथ में पीले चावल, हल्दी और पीले फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।
इसके बाद शुद्ध होकर पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
घर के पूजा स्थल पर पूर्व दिशा में एक चौकी रखें।
चौकी पर मां बगलामुखी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
इसके बाद हाथ धोएं और आसन को पवित्र करें।
पूजा में विशेष रूप से पीले फूल, और पीले फलों का उपयोग करें।
पूजन के दौरान मां बगलामुखी को धूप-दीप और अगरबत्ती दिखाएं।
इसके बाद माता को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं।
व्रत के दौरान दिनभर निराहार रहें, हालांकि रात में फलाहार किया जा सकता है।
अगले दिन पूजा करने के बाद ही भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करें।





