पश्चिम एशिया जारी युद्ध ने भारतीय शेयर बाजार को बुरी तरह झकझोर डाला है. मार्च के महीने में बाजार में कमजोरी इस कदर गहराई है कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सूचीबद्ध आधे से अधिक शेयर अपने एक साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. डराने वाली बात यह है कि हर पांच में से एक शेयर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर तक फिसल गया है. गिरावट का यह दौर केवल छोटे शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वसनीय माने जाने वाले ए और बी ग्रुप के करीब 1,000 शेयर भी इस मंदी की चपेट में हैं. साल 2024 के अपने उच्चतम स्तर से अब तक बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (Market Cap) 56 लाख करोड़ रुपये घट चुका है.
बीएसई में सक्रिय रूप से सूचीबद्ध कुल 4,270 शेयरों में से 2,234 शेयर इस महीने अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर तक गिर चुके हैं. साल 2026 की शुरुआत से अब तक निफ्टी और सेंसेक्स में लगभग 12% की गिरावट दर्ज की गई है. विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध की वजह से कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं. यह न केवल चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ा सकती हैं, बल्कि सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी डालेंगी, जिससे व्यापक आर्थिक दबाव पैदा होगा. महंगाई बढ़ने की आशंका से भी निवेशक बाजार से पैसा निकाल रहे हैं.
अमेरिका-ईरान युद्ध की आग में झुलसा दलाल स्ट्रीट, हर दूसरा शेयर 52 हफ्ते के निचले स्तर पर, ₹56 लाख करोड़ स्वाहा
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