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पश्चिम एशिया संकट के बीच एस. जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अराघची से की बात, तीसरी बार किया फोन

पश्चिम एशिया संकट के बाद और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे असर के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार (10 मार्च) शाम को अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद यह तीसरी बार है जब जयशंकर ने अराघची से फोन पर चर्चा की है।

इस दौरान जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून से भी बातचीत की और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा, “आज शाम ईरान के विदेश मंत्री अराघची के साथ संघर्ष से संबंधित नवीनतम घटनाक्रम पर विस्तृत बातचीत हुई। हम संपर्क में रहने पर सहमत हुए।”

ईरान द्वारा मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त करने की घोषणा के बाद दोनों विदेश मंत्रियों के बीच यह पहली फोन वार्ता थी। मोजतबा को सर्वोच्च नेता नियुक्त करने की घोषणा उनके पिता, अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य हमले में हत्या के कुछ दिनों बाद की गई।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि 4 मार्च को श्रीलंका के पास अमेरिका द्वारा एक ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने की घटना का इस बातचीत में जिक्र हुआ या नहीं। ईरान द्वारा फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक संकरे समुद्री परिवहन मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बाधित कर दिए जाने से वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उछाल देखा गया है।

जयशंकर ने अराघची को क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रम को लेकर भारत की गहरी चिंता से भी अवगत कराया। पश्चिम एशिया संकट के कारण ईरान को निर्यात किया जाना वाला करीब 345 करोड़ रुपये का माल कांडला और मुंद्रा बंदरगाहों पर पड़ा हुआ है।

लोकसभा में एक लिखित उत्तर में वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि, पश्चिम एशिया में युद्ध के हालात के कारण पोत परिवहन और बंदरगाह परिचालन बाधित हुआ हैं, जिससे माल की आवाजाही प्रभावित हो रही है।

ईरान को एक मार्च तक निर्यात किया जाने वाला 35,962 टन चावल, चाय और दवाओं की खेप कांडला बंदरगाह पर अटकी रही। इसका ‘फ्री ऑन बोर्ड’ (एफओबी) मूल्य 305.67 करोड़ रुपये है। एफओबी में माल और बंदरगाह से जहाज पर लादने तक का खर्च शामिल होता है।

इसी तरह मुंद्रा बंदरगाह पर भी ईरान को निर्यात के लिए 5,676 टन माल अटका हुआ था, जिसकी कीमत 40.72 करोड़ रुपये है।

इस पर जितिन प्रसाद ने कहा, “ईरान के साथ भारत का व्यापार मुख्य रूप से अनाज और दवाओं का है। पश्चिम एशिया के मौजूदा घटनाक्रमों के कारण माल की आवाजाही पर असर पड़ा है।”

अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के कारण जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है। ईरान भारतीय बासमती चावल के प्रमुख खरीदारों में से है।

 

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