कर्नाटक में साइबर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां 26 वर्षीय युवक को डेटिंग ऐप के जरिए ब्लैकमेल कर ₹1.53 लाख की रकम ऐंठ ली गई। शुरुआती तौर पर सामान्य बातचीत से शुरू हुआ यह मामला बाद में न्यूड वीडियो के जरिए धमकी और उगाही में बदल गया। पुलिस के मुताबिक, इस ठगी में AI से बनाए गए एक फर्जी महिला अवतार का इस्तेमाल किया गया।
पीड़ित युवक ने बेंगलुरु के केंद्रीय सीईएन पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। युवक का कहना है कि आरोपी उसे लगातार धमका रहे थे और पैसे न देने पर उसका अश्लील वीडियो सोशल मीडिया और उसके संपर्कों को भेजने की चेतावनी दी गई थी।
डेटिंग ऐप से शुरू हुआ फंदा
शिकायत के अनुसार, युवक ने डेटिंग ऐप Happn पर प्रोफाइल बनाई थी। इसी दौरान उसे ‘ईशानी’ नाम की महिला का मैसेज आया। बातचीत बढ़ी, फिर फोन नंबर साझा किए गए और चैट व्हाट्सएप पर होने लगी।
5 जनवरी को महिला ने युवक को वीडियो कॉल किया। कॉल के दौरान वह नग्न अवस्था में दिखाई दी और युवक को भी कपड़े उतारने के लिए उकसाया। युवक को भनक तक नहीं लगी कि इस पूरी बातचीत और उसकी निजी गतिविधियों को चुपचाप रिकॉर्ड किया जा रहा है।
वीडियो वायरल करने की धमकी
कुछ ही देर बाद युवक को उसके ही रिकॉर्ड किए गए वीडियो और तस्वीरें भेजी गईं। साथ में धमकी दी गई कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो ये वीडियो उसके दोस्तों और जान-पहचान वालों को भेज दिए जाएंगे। बदनामी के डर से युवक ने कई किश्तों में पैसे ट्रांसफर कर दिए।
इस तरह निकाले गए पैसे
एफआईआर के मुताबिक, ₹60,000 युवक ने अपने HDFC बैंक खाते से भेजे, जबकि ₹93,000 उसके एक दोस्त के कोटक महिंद्रा बैंक खाते से ट्रांसफर किए गए। इस तरह कुल ₹1.53 लाख की रकम आरोपियों तक पहुंची।
आरोपियों ने यह पैसा SBM बैंक से जुड़े खातों में, अलग-अलग UPI ID के जरिए जमा करवाया। जब इसके बाद भी और पैसों की मांग की जाने लगी, तब पीड़ित ने पुलिस का रुख किया।
AI अवतार से की गई ठगी
पुलिस की शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि वीडियो कॉल में दिखाई देने वाली महिला असल में कोई वास्तविक व्यक्ति नहीं थी। एक जांच अधिकारी के अनुसार, “आरोपियों ने AI तकनीक से तैयार किए गए महिला अवतार का इस्तेमाल किया, ताकि पीड़ित को झांसे में लिया जा सके।” पुलिस को शक है कि यह मामला किसी साइबर ब्लैकमेलिंग गिरोह से जुड़ा हो सकता है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। बैंक ट्रांजैक्शन, UPI रिकॉर्ड और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें गठित की गई हैं।





