छत्तीसगढ़

नाम और रूप दोनों भगवान है डॉ.स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ

विधानसभा परिसर में श्री अरविंद मिश्रा परिवार की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में व्यास आसन पर विराजमान शंकराचार्य आश्रम के प्रमुख डॉ. स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने भगवान श्री कृष्ण के नामकरण लीला को प्रकाशित करते हुए बताया कि नाम और रूप दोनों भगवान हैं इनमें कोई छोटा और बड़ा नहीं है रूप के बिना नाम, और नाम के बिना रूप की कोई सत्ता नहीं है। श्री गर्गाचार्य जी महाराज ने नंद बाबा के सामने भगवान का नाम प्रकट करते हुए कहा कि भगवान के नाम और रूप अनंत हैं उनकी कोई सीमा नहीं है संसार के प्राणी भगवान के नाम और रूपों को अच्छी तरह से नहीं जान सकते हैं, जो भगवान के नाम और रूप को जान लेता है और उनसे प्रीति करने लगता है तो भगवान भी उनके नाम रूपों को मिटाकर अपने नाम रुप में मिला लेता है, उनके समस्त दोषों को भगवान स्वयं नष्ट कर देते है। गर्गाचार्य जी ने कहा नंद तुम्हारे पुत्र के गुण नारायण के समान हैं अर्थात श्री कृष्ण के गुण गणों की बराबरी यदि कोई कर सकता है तो वह केवल नारायण ही कर सकते हैं। सुधि वक्ता ने इसके पूर्व गोकुल के आनंद का वर्णन करते हुए पूतना वध के प्रसंग की कथा सुनाइ पूतना साक्षात अबिद्या का स्वरूप है इसका प्रभाव उन्ही स्थान और व्यक्तियों पर होता है जहां भगवान के गुण गणों की चर्चा नहीं होती है जहां वेदध्वनि नहीं होती है और जहां संत महात्माओं के चरण प्रक्षालन नहीं किए जाते ऐसे स्थानों में असद् शक्तियों का प्रभाव माना जाता है। कथा के पूर्व शंकराचार्य आश्रम के वैदिक विद्वानों ने यजमान श्री प्रभाशंकर मिश्र श्रीमती सुलोचना मिश्रा से पोती का पूजन कराया तथा परिवार की अन्य लोगों ने मिलकर भी भागवत भगवान की आरती की।

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