छत्तीसगढ़

भास्कर दूत खबर का असर… घोरतलाब स्कूल भवन की प्रभारी मंत्री ने की घोषणा, मोरकुटूम का प्रवेश उत्सव भाजपा की गुटबाजी की भेंट चढ़ा

घोरतलाब के बच्चों की आवाज़ बनी खबर, मंत्री ने मंच से की स्कूल भवन स्वीकृति की घोषणा*
(अकील मेमन )

छुरिया। पत्रकारिता का उद्देश्य केवल समाचार प्रकाशित करना नहीं, बल्कि जनसमस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाकर उनका समाधान कराना भी है। इसका ताज़ा उदाहरण राजनांदगांव जिले के छुरिया विकासखंड के ग्राम मोरकुटूम में आयोजित ब्लॉक स्तरीय प्रवेश उत्सव कार्यक्रम में देखने को मिला।

भास्कर दूत द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित समाचार में बताया गया था कि घोरतलाब के मिडिल स्कूल के छात्र-छात्राएं भवन के अभाव में वर्षों से प्रार्थना शेड के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। यह खबर जैसे ही जिले के प्रभारी मंत्री गजेन्द्र यादव के संज्ञान में आई, उन्होंने कार्यक्रम के दौरान ही घोरतलाब के लिए नए स्कूल भवन की स्वीकृति देने की घोषणा कर दी। इस घोषणा से क्षेत्र के विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई।

कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष किरण वैष्णव द्वारा क्षेत्र की विभिन्न विकास संबंधी मांगें भी प्रभारी मंत्री के समक्ष रखी गईं, जिनमें से कई निर्माण कार्यों को मौके पर ही स्वीकृति प्रदान किए जाने की घोषणा की गई।

इस अवसर पर खुज्जी विधायक भोलाराम साहू, जिला भाजपा अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत, महापौर मधुसूदन यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण वैष्णव, रविन्द्र वैष्णव, भाजपा मंडल अध्यक्ष कांता साहू, जनपद पंचायत अध्यक्ष संजय सिन्हा, नायडू पिल्ले व भाजपा नेत्री भेष साहू, भाजपा नेता एम.डी. ठाकुर, चंद्रिका डड़सेना, रोमी भाटिया सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

*स्वागत और भाषण के दौरान उभरी गुटबाजी की चर्चा*

कार्यक्रम जहां एक ओर घोषणाओं के कारण चर्चा में रहा, वहीं दूसरी ओर मंच संचालन और नेताओं को दिए गए महत्व को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज रहीं।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, स्वागत एवं भाषण के लिए जिन नेताओं की सूची तैयार की गई, उसे लेकर कई नेताओं में असंतोष देखा गया। यह भी चर्चा रही कि सूची किसके निर्देश पर बनाई गई और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से इस संबंध में पर्याप्त समन्वय नहीं किया गया।

सूत्रों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी में सामान्यतः संगठन के पदाधिकारियों को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन इस कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेताओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिला। मंच पर प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रियता अधिक दिखाई दी, जबकि कई राजनीतिक पदाधिकारी स्वयं को उपेक्षित महसूस करते रहे।

सबसे अधिक चर्चा इस बात की रही कि जनपद पंचायत अध्यक्ष संजय सिन्हा को मंच पर मौजूद होने के बावजूद संबोधन का अवसर नहीं मिला। इससे उनके समर्थकों में नाराजगी देखी गई। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए पोस्टरों में मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री तथा जनपद पंचायत अध्यक्ष संजय सिन्हा का चित्र नहीं होने को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की छोटी-छोटी व्यवस्थागत चूकें बड़े राजनीतिक संदेश देती हैं। जब सार्वजनिक मंचों पर वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा का संदेश जाता है तो संगठन के भीतर असंतोष बढ़ना स्वाभाविक माना जाता है।

*सरकारी कार्यक्रम या राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन?*

कार्यक्रम के दौरान मंच और आयोजन प्रमुख भूमिका भाजपा मण्डल अध्यक्ष छुरिया का होना था जो कही नजर नहीं आया उक्त आयोजन अगर सरकारी था तो उसमें राजनीतिक स्वरूप अधिक दिखाई दिया।

हालांकि, जनपद पंचायत अध्यक्ष संजय सिन्हा ने प्रभारी मंत्री के समक्ष क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं और विकास कार्यों की मांग रखी। प्रभारी मंत्री ने कई मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कुछ कार्यों की मौके पर ही स्वीकृति देने की घोषणा की, जिससे कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों में उत्साह का माहौल देखने को मिला।

*जनहित की पत्रकारिता की जीत*

घोरतलाब स्कूल भवन की घोषणा इस बात का प्रमाण है कि यदि स्थानीय समस्याओं को तथ्यात्मक और जिम्मेदारी के साथ प्रमुखता से उठाया जाए, तो शासन और प्रशासन तक उनकी आवाज़ पहुंचती है। अब क्षेत्रवासियों की अपेक्षा है कि घोषणा केवल मंच तक सीमित न रहे, बल्कि शीघ्र प्रशासनिक स्वीकृति, बजट आवंटन और निर्माण कार्य प्रारंभ कर बच्चों को एक सुरक्षित एवं सुविधायुक्त विद्यालय भवन उपलब्ध कराया जाए।

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