कृषि उत्पादन आयुक्त ने विश्वविद्यालय के अनुसंधान प्रक्षेत्र में औषधीय एवं सगंध फसलों का अवलोकन किया। टिश्यू कल्चर लैब में केला, गन्ना और बांस के ऊतक संवर्धित पौधों के उत्पादन की जानकारी ली। उन्होंने कृषि संग्रहालय, विश्वविद्यालय के उत्पादों के विक्रय केंद्र और भारत सरकार द्वारा स्थापित आधुनिक मौसम वेधशाला का भी निरीक्षण किया।
डॉ. आर.एल. रिछारिया जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला और बायोटेक पार्क के भ्रमण के दौरान उन्हें देश के सबसे बड़े और विश्व के दूसरे सबसे बड़े धान जर्मप्लाज्म संग्रह के बारे में जानकारी दी। कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने बताया कि यहां धान की 23,250 पारंपरिक किस्मों के जनन द्रव्य संरक्षित हैं, जिनमें कई औषधीय और पोषक गुणों से भरपूर हैं। इनके आधार पर नई उन्नत धान किस्मों का विकास किया जा रहा है। इसके अलावा अन्य फसलों की छह हजार से अधिक किस्मों का भी संरक्षण किया गया है।
उन्होंने क्रॉप बायोफोर्टिफिकेशन लैब में संजीवनी राइस, जिंको राइस, न्यूट्री रिच राइस जीनोटाइप तथा बांस टिश्यू कल्चर पर चल रहे अनुसंधान और फाइटोसेनेटरी लैब का भी अवलोकन किया। इससे पूर्व आयोजित बैठक में कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विश्वविद्यालय की शिक्षण, अनुसंधान, विस्तार सेवाओं और किसानों के हित में संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी दी। बैठक में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, अधिष्ठाता और विभागाध्यक्ष भी उपस्थित थे।




