21वीं सदी में युद्ध के तौर-तरीके बदल चुके हैं. थल सेना की जगह पर मॉडर्न डे वॉरफेयर में एयरफोर्स और नेवी की भूमिका अहम हो गई है. इसके साथ ही एक गंभीर समस्या भी सामने आने लगी है. वो है पहले से ज्यादा ताकतवर और विध्वंसक एरियल थ्रेट यानी हवाई खतरा. आज के दिन कई ऐसी मिसाइलें हैं, जिनकी रफ्तार इतनी ज्याद है कि उन्हें इंटरसेप्ट करना सामान्य रडार सिस्टम के बस की बात नहीं है. इसके अलावा स्टील्थ फाइटर जेट सुरक्षा के लिए नया चैलेंज है. रूस-यूक्रेन और ईरान जंग में एक और गंभीर खतरा उभरकर सामने आया है. वो हैं ड्रोन और लॉयटरिंग म्यूनिशंस. ऐसे में आधुनिक और एडवांस एरियल थ्रेट से निपटने के लिए उससे भी ज्यादा ठोस, मॉडर्न और ताकतवर टेक्नोलॉजी की जरूरत है. हवाई खतरे को देखते हुए अमेरिका ने 175 अरब डॉलर की लागत से गोल्डन डोम डेवलप करने का फैसला किया है. दूसरी तरफ भारत ने भी लाखों करोड़ रुपये की लागत से मिशन सुदर्शन चक्र लॉन्च किया है. मिशन सुदर्शन चक्र नेशनल एयर डिफेंस प्रोग्राम है, जिनमें कई तरह के एंटी एयरक्राफ्ट, एंटी मिसाइल और एंटी ड्रोन सिस्टम को इंटीग्रेट किया जाना है. इसे साल 2035 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. रूसी S-400 एयर डिफेंस सिस्टम भी इसी मिशन का हिस्सा है. S-400 ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी ताकत से दुनिया को अवगत कराया था. इसके बाद भारत ने S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की पांच अतिरिक्त स्क्वाड्रन खरीदने का फैसला किया है. S-400 की नई खेप पहले के मुकाबले काफी ताकतवर और एडवांस होने वाली है. इसमें भारत के मन मुताबिक अपग्रेडेशन भी किया गया है.
दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक के बाद भारत अपने वायु रक्षा तंत्र को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है. रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) द्वारा रूस से पांच अतिरिक्त S-400 Triumf स्क्वाड्रन खरीदने को मंजूरी मिलने के बाद अब इन नई यूनिट्स में उन्नत एंटी ड्रोन क्षमताएं और नेटवर्क सेंट्रिक इंटीग्रेशन शामिल किए जाने की तैयारी है. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ये अपग्रेड हाल के संघर्षों और खासकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए किए जा रहे हैं. आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप में ड्रोन और लॉयटरिंग म्यूनिशन का खतरा तेजी से बढ़ा है. कम लागत वाले लेकिन बड़ी संख्या में आने वाले इन हवाई खतरों ने पारंपरिक लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. इसी को ध्यान में रखते हुए नए S-400 स्क्वाड्रन को छोटे और अधिक फुर्तीले इंटरसेप्टर मिसाइलों से लैस किया जाएगा. इनमें खास तौर पर 9M96E और 9M96E2 मिसाइलें शामिल होंगी, जो एक साथ कई लक्ष्यों को साधने में सक्षम हैं. इन कॉम्पैक्ट मिसाइलों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक लॉन्चर में अधिक संख्या में मिसाइलें रखी जा सकती हैं. इससे S-400 सिस्टम की एंगेजमेंट कैपेसिटी बढ़ जाती है, यानी वह एक साथ कई ड्रोन या अन्य हवाई खतरों को निष्क्रिय कर सकता है. यह क्षमता खास तौर पर ‘स्वार्म अटैक’ जैसी स्थितियों में बेहद अहम मानी जा रही है, जहां दर्जनों ड्रोन एक साथ हमला करते हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने पाकिस्तानी फाइटर जेट्स और मिसाइल्स को सफलतापूर्वक न्यूट्रालाइज किया था. इसके बाद पाकिस्तान को अपने डिफेंस लाव-लश्कर को S-400 के रेंज से दूर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है.




