छत्तीसगढ़

हिमांशु द्विवेदी के सवालों के सामने नेताओं की हुई असली परीक्षा, डॉ. रमन सिंह की सहजता और संयम ने जीता दिल

*आईएनएच 24×7 के संवाद मंच पर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने, चार घंटे तक चली बेबाक बहस बनी शहर की सबसे बड़ी राजनीतिक चर्चा*

(*अकिल मेमन*)
राजनांदगांव। शहर में आयोजित आईएनएच 24×7 न्यूज़ चैनल के विशेष संवाद कार्यक्रम में हरिभूमि के प्रधान संपादक हिमांशु द्विवेदी के तीखे, तथ्यपरक और बेबाक सवालों ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं को खुलकर अपनी बात रखने का अवसर दिया। करीब चार घंटे तक चले इस संवाद में नेताओं की राजनीतिक समझ, तैयारी, जवाबदेही और विषयों पर पकड़ की खुली परीक्षा हुई। एक ही मंच पर सत्ता और विपक्ष के प्रमुख चेहरे आमने-सामने रहे, जिससे जनता को दोनों पक्षों की सोच और कार्यशैली को करीब से समझने का अवसर मिला। पूरे आयोजन में हिमांशु द्विवेदी की निष्पक्ष, निर्भीक और संतुलित प्रश्न शैली की व्यापक सराहना हुई।
*डॉ. रमन सिंह के अनुभव, विकास विजन और आत्मीयता ने छोड़ी अलग छाप*
राजनांदगांव से लगातार विधायक, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने सहज, संयमित और आत्मीय अंदाज से पूरे कार्यक्रम में विशेष छाप छोड़ी। भाजपा जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत ने कहा कि प्रदेश और विशेष रूप से राजनांदगांव के विकास में डॉ. रमन सिंह का योगदान ऐतिहासिक रहा है। उन्होंने मेडिकल कॉलेज, अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम, खेल एवं अधोसंरचना विकास सहित अनेक महत्वपूर्ण कार्यों का उल्लेख किया।
जिले के वरिष्ठ भाजपा नेता खूबचंद पारख ने भी विभिन्न विषयों पर अनुभव, तथ्यों और संतुलित तर्कों के साथ अपनी बात रखी, जिसकी उपस्थित लोगों ने सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान हिमांशु द्विवेदी ने जब डॉ. रमन सिंह से राजनांदगांव से उनके जुड़ाव को लेकर प्रश्न किया, तो उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि “राजनांदगांव मेरी राजनीतिक यात्रा को पुनर्जीवन देने वाली भूमि है। यहां की जनता से मेरा आत्मीय रिश्ता है और यह अपनापन जीवनभर नहीं भूल सकता।” उन्होंने कहा कि जिले के समग्र विकास के लिए उनके पास अभी भी अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं और विजन हैं, जिन पर आने वाले समय में तेजी से काम होगा।
*”कुछ जवाब न्यायालय पर छोड़ देना उचित होगा” — एक वाक्य बना पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी चर्चा*
कार्यक्रम के अंतिम चरण में हिमांशु द्विवेदी ने डॉ. रमन सिंह से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर टिप्पणी करने का आग्रह किया। कुछ क्षणों के विराम के बाद डॉ. रमन सिंह ने मुस्कुराते हुए केवल इतना कहा— “कुछ जवाब न्यायालय पर छोड़ देना ही उचित होगा।” उनका यह संक्षिप्त लेकिन अर्थपूर्ण उत्तर पूरे कार्यक्रम की सबसे चर्चित टिप्पणी बन गया। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी लोग इस जवाब के राजनीतिक संकेतों और उसके निहितार्थों पर चर्चा करते रहे।
*जनहित के मुद्दों पर विपिन यादव रहे सबसे मुखर*
कांग्रेस की ओर से शहर अध्यक्ष जितेंद्र मुदलियार ने बिजली व्यवस्था सहित कई जनहित के मुद्दे उठाए, लेकिन लगभग 17 करोड़ रुपये के चर्चित बूढ़ासागर प्रोजेक्ट पर सवाल रखते समय वे अपने तर्कों में उलझते नजर आए।
वहीं, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष विपिन यादव ने पूरे कार्यक्रम में विपक्ष की ओर से सबसे मुखर भूमिका निभाई। उन्होंने तथ्यों, आत्मविश्वास और बेबाक अंदाज के साथ सत्ता पक्ष से लगातार सवाल किए। जनहित के मुद्दों पर उनकी स्पष्ट प्रस्तुति, त्वरित जवाब और राजनीतिक पकड़ ने उन्हें विपक्ष की ओर से सबसे प्रभावी वक्ताओं में शामिल कर दिया। कार्यक्रम के बाद भी उनकी सक्रिय भूमिका और प्रस्तुत तर्क चर्चा का विषय बने रहे।
*धान सूखत और घोटाले के मुद्दे पर सत्ता पक्ष घिरा*
कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं ने जिले की सहकारी समितियों में धान सूखत और कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष सचिन बघेल ने कहा कि मामले की समीक्षा की जा रही है, लेकिन उनका जवाब कई लोगों को संतोषजनक नहीं लगा।
इसी दौरान जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष विपिन यादव ने धान घोटाले का मुद्दा प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद आज तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई। उन्होंने इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की। उनके सवालों पर सत्ता पक्ष की ओर से कोई स्पष्ट और ठोस उत्तर सामने नहीं आ सका, जिससे यह मुद्दा भी कार्यक्रम की प्रमुख चर्चाओं में शामिल रहा।
*चार घंटे तक चला संवाद, राजनीति को मिली नई चर्चा*
करीब चार घंटे तक चले इस संवाद ने राजनांदगांव की राजनीति को नई चर्चा दे दी। मंच पर हुए सवाल-जवाब, नेताओं की प्रतिक्रियाएं और डॉ. रमन सिंह के संयमित व सहज उत्तर कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता रहे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी लोग नेताओं के जवाबों, उठाए गए जनहित के मुद्दों और राजनीतिक संदेशों पर अपने-अपने ढंग से चर्चा करते नजर आए। कुल मिलाकर यह आयोजन राजनांदगांव के हाल के वर्षों के सबसे चर्चित राजनीतिक संवादों में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहा

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