नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बनाए रखने तथा संभावित जमाखोरी को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल उपभोक्ताओं की पेट्रोल पंपों से थोक ईंधन खरीद पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया है। यह प्रतिबंध शुरुआती तौर पर 90 दिनों तक लागू रहेगा।
सरकार के नए आदेश के अनुसार, बड़े पैमाने पर ईंधन का उपयोग करने वाले उद्योगों, संस्थानों और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अब अपनी जरूरत का पेट्रोल और डीजल रिटेल पेट्रोल पंपों की बजाय बल्क सेल पॉइंट्स या अधिकृत थोक केंद्रों से खरीदना होगा।
बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में कुछ क्षेत्रों में डीजल की मांग में असामान्य वृद्धि देखी गई। इसकी प्रमुख वजह रिटेल और थोक कीमतों के बीच बड़ा अंतर है। इसी कारण कई बड़े उपभोक्ताओं ने थोक केंद्रों के बजाय पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदना शुरू कर दिया था।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 11 जून को जारी आदेश में तेल विपणन कंपनियों और अधिकृत ईंधन विक्रेताओं को यह अधिकार दिया है कि वे रिटेल आउटलेट्स से बल्क खरीद पर रोक लगा सकें। सरकार का कहना है कि यह कदम वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम सप्लाई चेन पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए उठाया गया है।
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि देश के कुछ हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की रिटेल बिक्री में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसका कारण थोक और रिटेल कीमतों के अंतर का फायदा उठाकर बड़े उपभोक्ताओं का पेट्रोल पंपों की ओर रुख करना है।
नए नियमों के तहत रिटेल पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री केवल वाहन के फ्यूल टैंक या पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) से स्वीकृत कंटेनरों तक सीमित रहेगी। साथ ही, प्रति ग्राहक या वाहन प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल खरीदने की सीमा तय की गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस तरह खरीदे गए डीजल का पुनर्विक्रय नहीं किया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि यदि बड़े उपभोक्ता रिटेल आउटलेट्स से भारी मात्रा में ईंधन खरीदते हैं तो आम नागरिकों के लिए सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे स्थानीय स्तर पर कमी और आवश्यक सेवाओं में बाधा आने की आशंका बढ़ सकती है।
सरकार ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को जमाखोरी, कालाबाजारी, अनधिकृत खरीद और ईंधन के दुरुपयोग के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, सरकार को विशेष परिस्थितियों में किसी उपभोक्ता, क्षेत्र या लेन-देन की श्रेणी को इस आदेश से छूट देने का अधिकार भी रहेगा। सरकार का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की निर्बाध और समान उपलब्धता सुनिश्चित करना है।





