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आईडीबीआई बैंक बिकने के बाद कर्मचारियों का क्या होगा? सरकार ने कर दिया क्लीयर

सरकार ने जब से आईडीबीआई बैंक में बड़ी हिस्सेदारी बेचने का ऐलान किया है, सबसे ज्यादा चिंता में बैंक के कर्मचारी हैं. उन्हें यही डर सता रहा है कि नया मैनेजमेंट आने के बाद उनकी सेवा और शर्तों पर बुरा असर न पड़े. लेकिन, सरकार की ओर से अब इस डर को खत्म करने वाला संकेत आया है. निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव अरुणीश चावला ने बताया है कि कनाडा की फेयरफेक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को आईडीबीआई बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी की बिक्री के बाद भी इसके कर्मचारियों की सेवा शर्तें अपरिवर्तित रहेंगी.
चावला ने बताया कि आईडीबीआई बैंक में 60 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी को 52,878 करोड़ रुपये में बेचने से मौजूदा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को डरने की कोई जरूरत नहीं है. चावला ने कहा कि शेयर खरीद समझौते के अनुसार, रणनीतिक खरीदार द्वारा मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों को बदला, संशोधित या नुकसान पहुंचाने वाला फेरबदल नहीं किया जा सकता है. शीर्ष नौकरशाह की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब बैंक के कर्मचारी सरकार के इस कदम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
नवंबर में हड़ताल पर जाने वाले हैं कर्मचारी
आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों ने नवंबर की शुरुआत में सभी शाखाओं में हड़ताल का आह्वान किया है. बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के संगठनों का शीर्ष मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन ने भी उनकी हड़ताल को समर्थन दिया है. पेंशनभोगियों की चिंताओं को दूर करते हुए चावला ने कहा कि एक विशेष पेंशन फंड अलग रखा गया है और सभी प्रतिबद्धताओं का सम्मान किया जाता रहेगा.
सरकार तय नहीं करती सेवा शर्तें
दीपम के सचिव ने कहा कि आईडीबीआई बैंक एक राष्ट्रीयकृत बैंक नहीं है और बैंक कर्मचारियों की सेवा शर्तें भारत सरकार द्वारा तय नहीं की जाती हैं, बल्कि कर्मचारियों के परामर्श से निदेशक मंडल द्वारा तय की जाती हैं. चावला ने कहा कि आईडीबीआई बैंक का चालू इकाई के रूप में पुनर्गठन किया जा रहा है और भविष्य में भी यह एक बोर्ड-प्रबंधित कंपनी होगी. यह आज कंपनी और श्रम कानून के तहत काम करती है, यह कल भी कंपनी और श्रम कानून के तहत काम करती रहेगी. मैनेजमेंट बदलने का भी इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

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