छत्तीसगढ़

स्वच्छता के प्रति आदिम जाति विभाग का उल्लेखनीय पहल

स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए आदिम जाति, अनुसूचित जाति तथा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग ने नवा रायपुर स्थित ’’जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरटीआई)’’ परिसर में आज प्लास्टिक कचरा प्रबंधन की नई शुरुआत की है। विभाग ने ’’बिसलेरी कंपनी’’ के साथ प्लास्टिक बोतलों एवं अन्य प्लास्टिक कचरे के संग्रहण और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) के लिए समझौता किया है।

इस अवसर पर विभाग के प्रमुख सचिव ’’श्री सोनमणि बोरा’’ एवं टीआरटीआई की संचालक ’’श्रीमती हीना अनिमेष नेताम’’ ने परिसर में स्थापित विशेष प्लास्टिक कलेक्शन कंटेनर का शुभारंभ किया। प्रमुख सचिव श्री बोरा ने स्वयं पानी की खाली बोतल को निर्धारित कंटेनर में डालकर अधिकारियों, कर्मचारियों एवं आगंतुकों से अपील की कि वे उपयोग के बाद प्लास्टिक कचरे को इधर-उधर न फेंकें, बल्कि निर्धारित कंटेनर में ही डालें। उन्होंने कहा कि ’’स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त परिसर का निर्माण जनभागीदारी से ही संभव है’’ तथा प्रत्येक व्यक्ति का छोटा प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा योगदान बन सकता है।

समझौते के तहत कंटेनर में एकत्रित प्लास्टिक कचरे का संग्रहण एवं निष्पादन ’’बिसलेरी कंपनी’’ द्वारा किया जाएगा। इस प्लास्टिक का पुनर्चक्रण कर विभिन्न उपयोगी प्लास्टिक उत्पाद तैयार किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि इस पूरी प्रक्रिया में विभाग को किसी प्रकार का आर्थिक व्यय नहीं करना पड़ेगा। यह पहल न केवल प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा देगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का भी प्रभावी संदेश देगी।

प्रमुख सचिव श्री बोरा ने कहा कि स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बननी चाहिए। यदि प्रत्येक व्यक्ति प्लास्टिक कचरे के उचित निस्तारण का संकल्प ले, तो स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण-अनुकूल समाज का निर्माण सहज रूप से किया जा सकता है।

इस अवसर पर टीआरटीआई की संयुक्त संचालक ’’श्रीमती गायत्री नेताम’’ सहित विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

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