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PFBR से भारत ने कैसे बदल दिया परमाणु ऊर्जा का गेम, यूरेनियम वाली दिक्कत खत्म, अब काम आएगा देश का खजाना

भारत ने अपने परमाणु प्रोजेक्ट में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है. यहां तमिलनाडु के कल्पाक्कम में स्थित 500 मेगावॉट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रिडर रिएक्टर (PFBR) अब क्रिटिकलिटी की स्थिति तक पहुंच गया है. इसका मतलब यह है कि रिएक्टर के भीतर नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया (Controlled fission chain reaction) सफलतापूर्वक शुरू हो गई है. यह उपलब्धि सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की परमाणु नीति के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को भारत के परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण की दिशा में ‘निर्णायक कदम’बताया. उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बना रिएक्टर भारत की वैज्ञानिक क्षमता और इंजीनियरिंग ताकत को दर्शाता है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह उपलब्धि भारत को अपने विशाल थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ाएगी, जो परमाणु कार्यक्रम के तीसरे चरण का आधार है.
कितनी बड़ी गेम चेंजर यह क्रिटिकलिटी?
दरअसल, ‘क्रिटिकलिटी’ परमाणु इंजीनियरिंग में एक बेहद अहम चरण होता है. इसका मतलब होता है कि रिएक्टर के भीतर परमाणु विखंडन की प्रक्रिया अब खुद-ब-खुद चलने लगी है और उसे बनाए रखने के लिए बाहरी ऊर्जा की जरूरत नहीं है. हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि रिएक्टर अब पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन करने लगेगा. इसके बाद एक लंबी और सावधानीपूर्वक प्रक्रिया शुरू होती है, जिसमें धीरे-धीरे पावर बढ़ाई जाती है और हर चरण में सुरक्षा और प्रदर्शन की बारीकी से जांच की जाती है.

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