क्रांइमदेश

इंटरस्टेट साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश, 11 गिरफ्तार, विदेश से चल रहे सिंडिकेट का खुलासा

नई दिल्ली: राजधानी में निवेश के नाम पर की जा रही बड़ी साइबर ठगी का खुलासा करते हुए क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल ने एक संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और एफआईआर के अनुसार कुल ठगी करीब 31.45 लाख रुपये की है।

जांच में सामने आया है कि यह गिरोह फर्जी बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था। पुलिस के अनुसार यही फर्जी खाते इस पूरे नेटवर्क की सबसे मजबूत कड़ी हैं, जिनके जरिए बड़े स्तर पर धोखाधड़ी की जा रही थी।

डीसीपी ने क्या बताया

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के डीसीपी आदित्य गौतम ने बताया, “इस पूरे मामले की जांच सामान्य निवेश ठगी व साइबर अपराधों की तरह ही की गई, लेकिन इसमें एक बेहद चौंकाने वाला पहलू सामने आया है वह है फर्जी बैंक खातों के एक संगठित सप्लाई चेन। यही बैंक खाते इस तरह के अपराधों की रीढ़ साबित हो रहे हैं।”

मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी

इस मामले में कोलकाता निवासी करण कजारिया को गिरफ्तार किया गया है, जिसे इस नेटवर्क का अहम हिस्सा माना जा रहा है। जांच में पता चला है कि वह पिछले करीब पांच वर्षों से इस अवैध गतिविधि में शामिल था और कंबोडिया व थाईलैंड जैसे देशों की लगातार यात्रा करता रहा है, जहां से इस रैकेट को विदेशी हैंडलर्स ऑपरेट करते हैं।

कई स्तरों पर काम करता था नेटवर्क

जांच में सामने आया है कि इन फर्जी बैंक खातों को तैयार करने और सप्लाई करने की प्रक्रिया कई स्तरों करीब पांच से छह लेयर में होती है। देशभर में करीब 24-25 मुख्य लोग इस काम में शामिल हैं, जो इन खातों को बनाकर विदेशी हैंडलर्स तक पहुंचाते हैं।

डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों में इस्तेमाल

डीसीपी आदित्य गौतम के अनुसार, इन खातों के जरिए बड़े पैमाने पर संदिग्ध लेन-देन किए गए हैं। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक इन खातों में हजारों करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन दर्ज है। इनका इस्तेमाल निवेश ठगी के साथ-साथ तथाकथित डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में भी किया जा रहा था।

आगे की कार्रवाई जारी

डीसीपी आदित्य गौतम ने कहा, “इस गिरफ्तारी से इस पूरे सिंडिकेट को बड़ा झटका लगा है.”

पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और विदेश में बैठे हैंडलर्स की पहचान कर आगे की कार्रवाई में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि बैंक खातों की सप्लाई चेन को तोड़कर ऐसे अपराधों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

 

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