भारत का नेशनल एयर डिफेंस सिस्टम धीरे-धीरे आकार लेने लगा है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO के वैज्ञानिक एक ऐसा सिस्टम डेवलप करने में जुटे हैं, जिससे किसी भी तरह के एरियल थ्रेट से निपटा जा सके. उस दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने अहम कदम बढ़ाया है. प्रोजेक्ट कुश के तहत तीन लेयर का एयर डिफेंस सिस्टम डेवलप किया जा रहा है. यह वायु सुरक्षा प्रणाली कम, मध्यम और लंबी दूरी तक के हवाई हमलों को इंटरसेप्ट कर उसे आसमान में ही तबाह कर सकता है. फाइटर जेट से लेकर बैलिस्टिक मिसाइल और क्रूज मिसइाल को भी यह सिस्टम इंटरसेप्ट कर सकता है. इसके अलावा ड्रोन अटैक से भी निपटना काफी आसान हो जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ऐतिहासिक लाल किला से नेशनल एयर डिफेंस सिस्टम डेवलप करने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र लॉन्च करने की घोषणा की थी. अब यह मिशन आकार लेने लगा है. प्रोजेक्ट कुश इसी मिशन सुदर्शन चक्र के मुकुट में जड़ा एक नायाब हीरा है. स्वदेशी तकनीक से डेवलप किए जा रहे प्रोजेक्ट कुश की तुलना रूस के एडवांस S-400 ट्रायंफ एयर डिफेंस सिस्टम से की जाने लगी है. S-400 ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी उपयोगिता साबित की थी. इसके बाद भारत ने रूस से इस एयर डिफेंस सिस्टम के 5 अतिरक्ति स्क्वाड्रन खरीदने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी है. दूसरी तरफ, भारतीय वैज्ञानिक स्वदेशी तकनीक से भी वायु सुरक्षा प्रणाली डेवलप कर रहे हैं. प्रोजेक्ट कुश की कई ऐसी विशेषताएं हैं, जो इसे S-400 ट्रायंफ एयर डिफेंस सिस्टम से बेहतर बनाते हैं. सबसे बड़ी खासियत इसका कॉस्ट इफेक्टिवनेस यानी किफायती होना है. एक विश्लेषण की मानें तो महज 5 स्क्वाड्रन में ही भारत ₹24000 करोड़ की बचत कर सकता है.
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