– रायपुर: राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय ने राज्य के लिए वर्ष 2026-27 में ₹1.45 लाख करोड़ की ऋण क्षमता का अनुमान लगाया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक है। इस क्षमता का खाका आज रायपुर में आयोजित ‘राज्य ऋण संगोष्ठी’ में जारी किए गए राज्य फोकस पेपर (SFP) 2026-27 में प्रस्तुत किया गया।
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ की कृषि उत्पादन आयुक्त (APC) एवं प्रमुख सचिव, कृषि विकास और किसान कल्याण विभाग, शहला निगार ने राज्य फोकस पेपर का विमोचन किया। कार्यक्रम में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधि, भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारी और विकास क्षेत्र से जुड़े हितधारक शामिल हुए।
जलवायु अनुकूल विकास पर जोर
राज्य फोकस पेपर में जलवायु अनुकूल विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के अभिसरण पर विशेष ध्यान केंद्रित करने की बात कही गई है। दस्तावेज में कृषि और संबद्ध गतिविधियों, एमएसएमई, मत्स्य पालन, डेयरी, वानिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा तथा अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऋण संभावनाओं का विस्तृत आकलन किया गया है।
राज्य की कृषि और आदिवासी बहुल अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पेपर में जलसंभर (वाटरशेड) आधारित विकास, किसान उत्पादक संगठनों को प्रोत्साहन, प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के सुदृढ़ीकरण व कंप्यूटरीकरण तथा ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया गया है।
*छोटे किसानों और महिलाओं पर फोकस*
अपने संबोधन में श्रीमती शहला निगार ने जिला स्तर की संभाव्यता युक्त ऋण योजनाओं (PLP) के माध्यम से नाबार्ड द्वारा किए गए जमीनी स्तर के ऋण नियोजन प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य फोकस पेपर बैंकों और संबंधित विभागों के लिए एक रोडमैप की तरह काम करेगा, जिससे चिन्हित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में संस्थागत ऋण का समय पर और पर्याप्त प्रवाह सुनिश्चित हो सकेगा।
उन्होंने सभी हितधारकों से समन्वय के साथ काम करने का आग्रह किया, विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों, आदिवासी परिवारों, महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए, ताकि छत्तीसगढ़ में समावेशी और सतत ग्रामीण विकास को गति मिल सके।
*नाबार्ड का निरंतर समर्थन*
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए नाबार्ड (छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय) के मुख्य महाप्रबंधक श्री डी. के. गवली ने बताया कि राज्य फोकस पेपर हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श और जिला-विशिष्ट क्षमताओं के संकलन का परिणाम है। उन्होंने ग्रामीण वित्तीय संस्थानों को पुनर्वित्त, RIDF के तहत बुनियादी ढांचा वित्तपोषण, वित्तीय समावेशन की पहल और विकासात्मक कार्यों के माध्यम से राज्य को नाबार्ड के निरंतर समर्थन को रेखांकित किया।
संगोष्ठी का समापन हितधारकों के बीच सार्थक चर्चा के साथ हुआ, जिसमें ऋण अवशोषण में सुधार, ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाने और छत्तीसगढ़ के सभी क्षेत्रों में संतुलित एवं समावेशी विकास प्राप्त करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।




