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राशि स्वीकृत, रंग-रोगन — पर जमीनी हकीकत में टूटी दीवारें, जर्जर कक्ष और बदहाल शौचालय |
नितेश मार्क/भास्कर दूत
दंतेवाड़ा। जिले के अंतर्गत स्थित आत्मिक शाला टेकनार झारापारा की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है।
इस विद्यालय में बालक और बालिकाएं अध्ययनरत हैं, किन्तु मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उनका भविष्य संकट में नजर आ रहा है। विद्यालय भवन पूरी तरह जर्जर अवस्था में है — दीवारें टूटी हुई, छत से प्लास्टर झड़ रहा है और कक्षाओं की हालत बदहाल है।
विद्यालय परिसर में शौचालय और स्नानघर की व्यवस्था केवल कागजों में दिखाई देती है।
हकीकत यह है कि लेट्रिग -बाथरूम के नाम पर केवल रंग-रोगन कर औपचारिकता पूरी कर दी गई है। उपयोग योग्य कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। इससे छात्र-छात्राओं को और शिक्षकों को भारी असुविधा और परेशानियां का सामना करना पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, विद्यालय के मरम्मत एवं विकास कार्यों हेतु राशि स्वीकृत कर संबंधित विभाग को समर्पित भी कर दी गई थी। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर न तो निर्माण कार्य हुआ और न ही किसी प्रकार की ठोस सुधारात्मक पहल दिखाई देती है। पूरा भवन टूटा-फूटा पड़ा है और रख-रखाव की कोई व्यवस्था नहीं है।
विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के अभिभावकों में भी आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण विद्यार्थियों को असुरक्षित और असुविधाजनक वातावरण में पढ़ाई करने को विवश होना पड़ रहा है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर स्थिति की ओर जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान नहीं जा रहा है। शिक्षा जैसी बुनियादी व्यवस्था में इस प्रकार की लापरवाही कई प्रश्न खडी करती है। अगर इस वजह से टूटी-फूटी दिवारी टूटी फूटी छत की वजह से बच्चों को अगर कोई भी समस्या हो जाती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
अब आवश्यकता है कि संबंधित विभाग और जिला प्रशासन तत्काल संज्ञान लेकर विद्यालय की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करें तथा मरम्मत, स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण मिल सके।




