अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारत पर 50% टैरिफ लगाए जाने से दोनों देशों के रिश्तों में इस समय खूब खटास देख जा रही है. वहीं इस तनाव के बावजूद भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग की डोर अब भी मजबूत बनी हुई है. इसी कड़ी में दोनों देशों ने सोमवार को अलास्का में अपने सबसे बड़े सैन्य अभ्यासों में से एक ‘युद्ध अभ्यास’ की शुरुआत की.
यह अभ्यास अलास्का के फोर्ट वैनराइट की बर्फीली जलवायु में किया जा रहा है, जहां मद्रास रेजीमेंट के 450 से अधिक भारतीय सैनिक अमेरिकी सेना की 11वीं एयरबोर्न डिविजन के आर्कटिक वोल्व्स ब्रिगेड कॉम्बैट टीम की 5वीं इन्फेंट्री रेजीमेंट ‘बॉबकैट्स’ के जवानों के साथ 14 सितंबर तक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में युद्धाभ्यास और सामरिक अभ्यास करेंगे.
विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी
भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट में बताया, ‘भारतीय सेना का एक दल युद्ध अभ्यास 2025 (01 – 14 सितंबर) के 21वें संस्करण के लिए फोर्ट वेनराइट, अलास्का 🇺🇸 पहुंच गया है. अमेरिकी 11वीं एयरबोर्न डिवीजन के सैनिकों के साथ, वे हेलीबोर्न ऑपरेशन, पर्वतीय युद्ध, यूएएस/काउंटर-यूएएस और संयुक्त सामरिक अभ्यासों का प्रशिक्षण लेंगे-जिससे संयुक्त राष्ट्र पीकेओ और बहु-क्षेत्रीय तत्परता को बढ़ावा मिलेगा.’
उधर रक्षा अधिकारियों का कहना है कि रणनीतिक साझेदारी पर फिलहाल कोई संकट नहीं है. एक अधिकारी ने कहा,’भरोसा जरूर कमजोर हुआ है, लेकिन दांव पर इतना कुछ लगा है कि यह साझेदारी इतनी आसानी से नहीं टूट सकती.’
भारत ने अमेरिका से खरीदे 25 अरब डॉलर के हथियार
पिछले दो दशकों में अमेरिका ने भारत को 25 अरब डॉलर से ज्यादा के रक्षा सौदे दिए हैं. हाल ही में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को अमेरिका की कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक से 99 GE-F404 टर्बोफैन इंजन की पहली खेप मिलनी शुरू हुई है. इन इंजनों को स्वदेशी तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमान में लगाया जाएगा. यह सौदा अगस्त 2021 में 716 मिलियन डॉलर का हुआ था. इसके अलावा भारत एक और समझौते के तहत 113 और इंजन खरीदने की तैयारी में है, जिसकी कीमत लगभग 1 अरब डॉलर होगी.
सिर्फ इतना ही नहीं, भारत ने अमेरिका से 31 MQ-9B ‘प्रिडेटर’ ड्रोन भी 3.8 अरब डॉलर में ऑर्डर किए हैं, जो 2029-30 के बीच मिलने शुरू होंगे.
वहीं, समुद्री मोर्चे पर भी सहयोग जारी है. भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया नवंबर में पश्चिमी प्रशांत महासागर के गुआम तट पर होने वाले मालाबार नौसैनिक अभ्यास के लिए तैयारी कर रहे हैं. मालाबार अभ्यास की शुरुआत 1992 में भारत-अमेरिका के बीच हुई थी, लेकिन अब इसमें सभी क्वाड देश शामिल हैं.
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि अगर मौजूदा हालात में भारत-अमेरिका रिश्तों की गिरावट जारी रही, तो आने वाले समय में रक्षा सौदों पर पुनर्विचार संभव है. फिलहाल भारत ने अपने रणनीतिक स्वायत्तता की नीति को जारी रखते हुए चीन के साथ भी संवाद बढ़ाया है और रूस के साथ पारंपरिक रक्षा संबंधों को मजबूती से निभा रहा है.




