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भारतीय सेना को क्यों हटा रहा मालदीव? क्या अब चीनी सैनिक लेंगे जगह, जानें नए राष्ट्रपति का क्या प्लान

मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने पद संभालने से पहले ही यह ऐलान कर दिया है कि मालदीव से भारतीय सैनिकों को हटाया जाएगा. आखिर भारतीय सैनिकों को हटाने की वजह क्या है, क्या मालदीव में भारतीय सैनिकों की जगह चीनी सैनिक ले लेंगे? हर भारतीयों के मन में ये सवाल कौंध रहे हैं. मगर अब खुद मालदीव ने नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने बता दिया है कि आखिर उनके दिमाग में क्या चल रहा है. मालदीव के आगामी राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने इस सप्ताह के अंत में पदभार ग्रहण करने के बाद भारतीय सैनिकों से वहां से चले जाने का आह्वान किया है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट कर दिया भारतीय सैनिकों की जगह मालदीव में चीनी सैनिक नहीं लेंगे. उन्होंने एएफपी को बताया कि वह भारतीय सैनिकों की बजाय चीनी सेना लाकर क्षेत्रीय संतुलन को फिर से बिगाड़ना नहीं चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता यानी जियोपॉलिटिकल राइवलरी में उलझने के लिए मालदीव बहुत छोटा है. मुझे मालदीव की विदेश नीति को इसमें शामिल करने में कोई खास दिलचस्पी नहीं है. बता दें कि सितंबर में मुइज्जू की चुनावी सफलता मालदीव में भारत के राजनीतिक और आर्थिक दबदबे के खिलाफ निरंतर अभियान और विशेष रूप से भारतीय सेनाओं को बाहर निकालने की उनकी प्रतिज्ञा पर निर्भर थी.

भारतीय सेना को वापस जाने का ऐलान कर चुके राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने कहा, मगर वह चीन या किसी अन्य देश को उनकी (भारतीय सैनिक) जगह लेने की इजाजत नहीं देंगे और उन्होंने इस खबर को भी खारिज कर दिया कि उनकी बीजिंग से काफी करीबी है. उन्होंने केवल इस बात पर जोर दिया कि वह वह केवल मालदीव समर्थक हैं. उन्होंने कहा,’ हम भारत-चीन के साथ-साथ सभी देशों के साथ मिलकर काम करने जा रहे हैं. बता दें कि राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू शुक्रवार को शपथ लेंगे. बता दें कि मोहम्मद मुइज्जू को चीन समर्थक माना जाता है.

मुइज्जू ने कहा कि उन्हें अनुमानित 50 से 75 भारतीय कर्मियों की वापसी पर नई दिल्ली के साथ औपचारिक बातचीत शुरू होने की उम्मीद है, जो एक संवेदनशील अभियान मुद्दा है. उन्होंने आगे कहा कि मालदीव के लोगों ने मालदीव में किसी भी सैन्य उपस्थिति की अनुमति देने के लिए मुझे वोट नहीं दिया है.इसलिए हम उन्हें हटाने के लिए भारत सरकार से बात कर रहे हैं और मुझे यकीन है कि हम शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से ऐसा कर सकते हैं.

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