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रुलाएगा पेट्रोल! इंटरनेशनल एजेंसी की चेतावनी, झुलसाएगी इजरायल-हमास युद्ध की आंच? खाना-पीना हो सकता है महंगा

इजरायल और हमास के बीच जारी युद्ध के कारण दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों पर संकट पैदा हो गया है. जानकारों का मानना है कि इससे उर्जा संकट पैदा होने की आशंका बहुत बढ़ गई है. इसका असर केवल कच्चे तेल ही बल्कि अन्य ऊर्जा स्रोतों पर भी होगा. दरअसल, ऐसी खबरें आ रही हैं कि अब अरब देश भी इस युद्ध में कूदने वाले हैं. अगर ऐसा होता है तो जाहिर तौर पर कच्चे तेल और नैचुरल गैस की आपूर्ति पर प्रभाव दिखेगा. इसे रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से जोड़कर समझा जा सकता है.

जिस तरह पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद उसने यूरोप में अपने कच्चे तेल की सप्लाई रोक दी थी और दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच गई थीं, वैसा ही कुछ यहां भी देखने को मिल सकता है. अगर इजरायल की उत्तरी सीमा पर स्थित ईरान और लेबनान खुलकर इस युद्ध में आते हैं तो सबसे बड़ा खतरा अरब गैस पाइपलाइन (AGP) को होगा. AGP मिस्र और जॉर्डन को जोड़ती है. जॉर्डन के लिए यह किसी बुरे सपने से कम नहीं होगा. जॉर्डन अपनी ऊर्जा जरूरतों का 90 फीसदी आयात करता है. गैस की आपूर्ति के लिए वह इजरायल और मिस्र पर निर्भर है.

विश्व बैंक की चेतावनी
विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर संघर्ष आगे और बढ़ता है तो ग्लोबल क्रूड सप्लाई में 20 लाख बैरल प्रतिदिन तक की गिरावट आ सकती है. ऐसे में कीतमों में 3 से 13 फीसदी तक का इजाफा संभव है. आपको बता दें कि फिलहाल कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दिख रही है. ब्रेंट क्रूड 81.44 और WTI क्रूड 77.02 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, अगर तेल की आपूर्ति में कटौती 30 से 50 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंचती है तो कीमतें 35 फीसदी तक बढ़कर 121 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है.

खाद्य पदार्थों की कीमतें
विश्व बैंक के उप-मुख्य अर्थशास्त्री अहान कोसे ने कहा है कि तेल की अगर कीमतें ऊंची जाती हैं और बरकरार रहती हैं तो इसका असर खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी निश्चित तौर पर पडे़गा. उनका कहना है कि इससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाएंगी जो कई देशों में पहले से ही बढ़ी हुई हैं. गौरतलब है कि भारत कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है.

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