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सोना खरीदने से पहले जान लें टैक्स का गणित, वरना लग सकती है तगड़ी चपत

भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि मुसीबत का साथी माना जाता है. लेकिन अगर आपने टैक्स का गणित नहीं समझा तो मुनाफा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है. आज सिर्फ गहने ही नहीं, बल्कि गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF), डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) जैसे कई ऑप्शन मौजूद हैं और हर एक पर टैक्स के नियम अलग हैं. कई बार लोग बिना जानकारी के निवेश कर लेते हैं और बेचते वक्त भारी टैक्स भरना पड़ जाता है. खास बात यह है कि कहीं 1 साल में टैक्स लगता है तो कहीं 2 साल बाद नियम बदल जाते हैं. ऐसे में सही ऑप्शन चुनना ही असली समझदारी है. सोना खरीदने से पहले टैक्स के इन नियमों को जानना बेहद जरूरी है, वरना आपकी कमाई पर ‘तगड़ी चपत’ लग सकती है. आइए इसे बेहद आसान भाषा में समझते हैं.
1. फिजिकल गोल्ड (गहने, सिक्के या ईंट)
अगर आप दुकान से सोना खरीदते हैं, तो इसे बेचने पर समय के हिसाब से टैक्स देना होगा. 2 साल से पहले बेचा तो मुनाफे को आपकी कुल कमाई में जोड़ दिया जाएगा और आपके टैक्स स्लैब (जैसे 5%, 20% या 30%) के हिसाब से टैक्स लगेगा. 2 साल के बाद बेचा तो इसे लॉन्ग टर्म माना जाएगा और मुनाफे पर सीधा 12.5% टैक्स लगेगा. अब इसमें महंगाई के हिसाब से मिलने वाली छूट यानी इंडेक्सेशन खत्म कर दी गई है.
2. गोल्ड ETF
अगर आप गोल्ड ईटीएफ के जरिए सोने में निवेश करते हैं और 1 साल से पहले बेचा तो आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स. 1 साल के बाद बेचा तो सीधा 12.5% टैक्स लगेगा.

3. डिजिटल गोल्ड
फोनपे, गूगल पे या अन्य ऐप्स से खरीदा गया सोना फिजिकल गोल्ड की तरह ही काम करता है: यहां भी 2 साल से कम रखने पर स्लैब रेट और 2 साल से ज्यादा रखने पर 12.5% टैक्स लगता है.

4. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड
यह निवेश का सबसे फायदेमंंद तरीका माना जाता है क्योंकि यहां सरकार आपको 2.5% सालाना ब्याज भी देती है. इसका सबसे बड़ा फायदा है कि अगर आप इस बॉन्ड को पूरे 8 साल (मैच्योरिटी) तक रखते हैं, तो मिलने वाले मुनाफे पर 1 रुपये भी टैक्स नहीं देना होगा. हालांकि, हर साल मिलने वाले ब्याज पर आपकी इनकम के हिसाब से टैक्स लगता है.

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