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क्या है वो AIS सेवा नियम, जिसके आधार पर दिल्ली में सस्पेंड हुए दो जज? आखिर क्या रही एक्शन की वजह

दिल्ली हाईकोर्ट ने दो जजों को निलंबित कर दिया है. ताजा नाम साकेत कोर्ट में तैनात जज वीना रानी का है. इससे पहले हाईकोर्ट ने 10 जुलाई को दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा के न्यायाधीश विनय सिंघल को सस्पेंड करने का आदेश जारी किया था. दोनों जजों से ये भी कहा गया है कि वह दिल्ली हाईकोर्ट के सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना दिल्ली नहीं छोड़ सकते.
दिल्ली में एक सप्ताह के अंदर ही दो जजों के निलंबन आदेश चर्चा का विषय बन गए हैं. जज विनय सिंघल को निलंबित क्यों किया गया इसका कारण तो नहीं बताया गया है, लेकिन जज वीना रानी के निलंबन आदेश में कहा गया है कि उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित हैं. खास बात ये है कि आदेश में अखिल भारतीय सेवा यानी AIS के अनुशासन एवं अपील 1969 के नियम 3(1)(a) का जिक्र किया गया है. हाईकोर्ट ने इसे आधार बनाते हुए उच्च न्यायिक सेवा नियम 1970 के नियम 27 के मिली शक्तियों के आधार पर ही यह कार्रवाई की है.

आखिर क्या हैं AIS का वो रूल जिसके तहत हुई कार्रवाई

AIS यानी ऑल इंडिया सर्विस.. का अनुशासन एवं अपील 1969 के नियम 3(1)(a) निलंबन से संबंधित है. इसके अनुसार यदि सरकार या सक्षम प्राधिकारी को लगता है कि किसी अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है या प्रस्तावित है तो उसे आधार मानकर निलंबित किया जा सकता है.
इसे आसान भाषा में कहें तो अगर मान लीजिए कि किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ शिकायत आई है और विभाग को लगता है कि जांच होनी चाहिए तो उसे तुरंत दोषी मानकर नौकरी से नहीं निकाला जाता, पहले जांच कराई जाती है. AIS का यह रूल ये अधिकार देता है कि जांच के दौरान संबंधित अधिकारी को निलंबित किया जा सके. इसके पीछे वजह होती है जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके और संबंधित अधिकारी अपने पद का इस्तेमाल सबूतों ओर गवाहों को प्रभावित करने के लिए न करे.

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