ईरान जंग से पूरी दुनिया में खलबली है. होर्मुज संकट से पश्चिम एशिया में तो त्राहि-त्राहि है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल-गैस के जहाज जहां-तहां फंसे हैं. अमेरिका-इजरायल के अटैक का बदला ईरान अब होर्मुद बंद करके ले रहा है. इससे भारत समेत कई देशों के जहाज फंसे हैं. अब पूरी दुनिया की नजर होर्मुज पर है कि कब ईरान उससे जहाजों को गुजरने देगा. इस तरह पूरी दुनिया अभी होर्मुज स्ट्रेट पर फंसी है. ऐसे में चीन चुपचाप इस होर्मुज संकट से बचने का रास्ता बना रहा है. जी हां, अमेरिका-ईरान जंग के कारण तेल के दाम बढ़ चुके हैं. गैस का संकट गहराता जा रहा है. बहरहाल, किसी भी तनाव से तेल के बाजार में हलचल बढ़ती है. कीमतें बढ़ती हैं, सप्लाई का डर बढ़ता है और आज होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी का केंद्र बन गया है. ऐसे में चीन एक अलग रास्ता अपना रहा है.
जी हां, होर्मुज पर चीन अभी हाथ पर हाथ रखे नहीं बैठा है. वह उसके पैरलल एक अलग व्यवस्था पर काम कर रहा है, जिससे फ्यूचर में उसे किसी होर्मुज की जरूरत नहीं होगी. चोकपॉइंट्स यानी होर्मुज संकट और जियोपॉलिटिकल जोखिमों पर रिएक्ट करने के बजाय बीजिंग उन पर अपनी निर्भरता पूरी तरह से कम करने के लिए काम कर रहा है. इस स्ट्रैटेजी के सेंटर में देशभर में बिजली सुपरग्रिड बनाने की एक बड़ी कोशिश है, जो देश की इकॉनमी को पावर देने के तरीके को पूरी तरह से बदल सकती है.




