भारत में चीनी उत्पादन लगातार दूसरे साल खपत से कम रहने की संभावना है. इस साल भी गन्ने की कम पैदावार के चलते मिलें सामान्य रूप से पहले बंद हो रही हैं. मामले से जुड़े उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि कम उत्पादन और बढ़ते निर्यात के कारण घरेलू भंडार घट सकते हैं और इससे स्थानीय बाजार में चीनी की कीमतों में उछाल देखा जा सकता है. इसका सीधा मलतब है कि आने वाले समय में घरेलू बाजार में चीनी का भाव बढ़ सकता है.
मुंबई स्थित एक वैश्विक व्यापार कंपनी के भारत प्रमुख ने कहा कि इस सीजन में चीनी उत्पादन 2.8 करोड़ मीट्रिक टन से ज्यादा होने की संभावना नहीं है. अधिकतर चीनी मिलें पहले ही बंद हो चुकी हैं, केवल कुछ ही अभी चालू हैं, जो आने वाले हफ्तों में बंद हो जाएंगी. सीजन की शुरुआत में इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) और नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) सहित उद्योग संगठनों ने 3.1 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान लगाया था, जबकि घरेलू मांग 2.9 करोड़ टन के बीच थी.
क्यों कम हो रही गन्ने की पैदावार
उद्योग जगत का कहना है कि अत्यधिक बारिश के कारण गन्ने की पैदावार कम रही और इस साल शुरू हुई 541 मिलों में से 467 मिलें मार्च के अंत तक बंद हो गईं. एनएफसीएसएफ के आंकड़ों के अनुसार. पिछले साल इसी समय तक 420 मिलें बंद हुई थीं. इस लिहाज से देखा जाए तो चालू वर्ष में अब तक बंद होने वाली मिलों की संख्या पिछले साल के मुकाबले कहीं ज्यादा है और इसका सीधा असर चीनी की पैदावार पर दिखेगा, जो बाद में उसकी कीमतें बढ़ने का कारण बन सकता है.




