ईरान और इजराइल के युद्ध ने भारतीय रिजर्व बैंक को गहरी मुसीबत में फंसा दिया है. उसके आगे कुआं तो पीछे खाई दिख रही है. हालात ऐसे बन गए हैं कि आरबीआई को रुपये में आ रही गिरावट को रोकना होगा या फिर अपने कैश रिजर्व के मोह को त्यागना पड़ेगा. रुपया और विदेशी मुद्रा भंडार यानी कैश रिजर्व दोनों ही देश और अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी हैं, लेकिन मौजूदा चुनौती के समय दोनों को साथ लेकर चलना काफी मुश्किल हो गया है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगर आरबीआई को दोनों में से एक को चुनना पड़े तो वह किसकी बलि दे सकता है.
इन सवालों के जवाब से पहले आपको यह जानना जरूरी है कि अगर यह सोच रहे हैं कि रुपये में गिरावट या फिर आरबीआई के कैश रिजर्व से आम आदमी का क्या लेनादेना तो बिलकुल गलत हैं. यह दोनों ही चीजों सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर असर डालती हैं और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर छोड़ती हैं. जाहिर है कि इससे आम आदमी ही नहीं, सरकार और उद्योग भी दबाव में रहेंगे. इसके व्यापक असर को देखते हुए ही आरबीआई इतनी आसानी से फैसला नहीं कर पा रहा है.
आरबीआई के आगे कुआं और पीछे खाई! अब रुपया बचाए या रिजर्व, देश के लिए दोनों जरूरी, पर एक की देनी होगी बलि
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