संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद बहरीन के उस प्रस्ताव पर मतदान करने वाला था, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. हालांकि वीटो शक्ति रखने वाले चीन ने स्पष्ट कर दिया था कि वह किसी भी ऐसे प्रस्ताव का विरोध करेगा जिसमें बल प्रयोग की अनुमति दी जाए. वहीं रूस ने भी ईरान का साथ देते हुए इस प्रस्ताव का विरोध किया. इस बीच चौंकाने वाली बात ये रही कि फ्रांस ने भी होर्मुज में सेना तैनात करने पर वीटो लगाया, जबकि वो खुद नाटो में शामिल देश है.
आपको बता दें कि फरवरी के अंत में अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हमले के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष अब एक महीने से ज्यादा समय तक चल चुका है. इस वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है. इसके चलते वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल देखा गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है.
आपको बता दें कि फरवरी के अंत में अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हमले के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष अब एक महीने से ज्यादा समय तक चल चुका है. इस वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है. इसके चलते वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल देखा गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है. इसी को लेकर बहरीन ने एक प्रस्ताव रखा था, जिसका विरोध चीन-रूस के साथ फ्रांस भी कर रहा है. चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से ये भी कहा गया है कि होर्मुज में अगर दिक्कतें हैं, तो इसकी वजह इजरायल-अमेरिका की अवैध एयरस्ट्राइक है.
होर्मुज खुलने नहीं देंगे रूस-चीन, UN में वीटो ठोककर बिगाड़ा खेल, खुल्लमखुल्ला ट्रंप के खिलाफ हुआ नाटो देश
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