अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और ईंधन की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कमी की है।
सरकारी आदेश के मुताबिक पेट्रोल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं डीजल पर यह शुल्क 10 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया है।
यह कटौती अमेरिका-इजरायल की ईरान से जंग और उसके कारण तेहरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट पर लगाई गई नाकाबंदी के कारण पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच की गई है। होर्मुज जलमार्ग विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति मार्ग है। युद्ध से पहले वैश्विक समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल और गैस का लगभग पांचवां हिस्सा यानी डेली 20 से 25 मिलियन बैरल कच्चा तेल और लगभग 10 अरब घन फुट गैस इसी मार्ग से भेजी जाती थी।
ATF पर नया टैक्स लागू
सरकार ने पहली बार एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लागू की है। नए नियमों के तहत ATF पर ₹50 प्रति लीटर टैक्स तय किया गया था, लेकिन छूट के बाद प्रभावी दर ₹29.5 प्रति लीटर हो गई है। इससे एयरलाइंस की लागत बढ़ने की संभावना है और इसका असर यात्रियों के टिकट किराए पर पड़ सकता है।
तेल कंपनियों को राहत
सरकार ने पेट्रोल पर टैक्स शून्य रखा है, जबकि डीजल पर ₹18.5 प्रति लीटर की दर तय की गई है। निर्यात के लिए पेट्रोल, डीजल और ATF पर कई शुल्कों से छूट दी गई है। 2022 में लागू विंडफॉल टैक्स को भी खत्म कर दिया गया है, जिससे घरेलू तेल कंपनियों को राहत मिलेगी। ये सभी नए नियम 26 मार्च 2026 से लागू हो चुके हैं।
क्या घटेंगे दाम?
हालांकि एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद भी आम लोगों को तुरंत राहत मिलने की संभावना कम है। “क्या कम होंगे पेट्रोल और डीजल के दाम” यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। ऐसे में भारतीय तेल कंपनियां हर लीटर पर करीब 48.8 रुपये का नुकसान उठा रही हैं। सरकार द्वारा दी गई राहत का इस्तेमाल कंपनियां अपने घाटे को कम करने में कर सकती हैं, इसलिए पंप पर कीमतों में तुरंत कमी की उम्मीद कम है।




