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NATO में मतभेद गहराए: ईरान मुद्दे पर सहयोगियों ने किया किनारा, ट्रंप का फूटा गुस्सा

वॉशिंगटन। NATO के भीतर एक बार फिर मतभेद खुलकर सामने आए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य अभियान में शामिल होने से ज्यादातर नाटो सहयोगियों ने इनकार कर दिया है, जिससे वे नाराज हैं।

ट्रंप ने अपने बयान में कहा, “हमें हमारे ज्यादातर नाटो सहयोगियों ने बताया है कि वे ईरान के ‘आतंकी शासन’ के खिलाफ हमारे सैन्य अभियान में शामिल नहीं होना चाहते।”

सहयोगियों के रुख से नाराज ट्रंप

ट्रंप ने नाटो देशों के इस रुख पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैं हमेशा मानता रहा हूं कि नाटो एकतरफा व्यवस्था है, हम उनकी रक्षा करते हैं, लेकिन जरूरत के समय वे हमारे लिए कुछ नहीं करते।”

हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अधिकांश देश इस बात से सहमत हैं कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना चाहिए।

लिंडसे ग्राहम का भी बयान

सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा,
“अभी-अभी राष्ट्रपति ट्रंप से बात हुई। बात हमारे यूरोपीय सहयोगियों की इस अनिच्छा के बारे में थी कि वे होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को चालू रखने के लिए संसाधन नहीं देना चाहते, जबकि इसका फ़ायदा अमेरिका से कहीं ज़्यादा यूरोप को होता है। मैंने अपनी ज़िंदगी में उन्हें इतना गुस्सा होते कभी नहीं सुना। जिस तरह के हालात दांव पर लगे हैं, उसे देखते हुए मुझे भी उतना ही गुस्सा आ रहा है।”

ईरान पर सैन्य कार्रवाई का दावा

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा,
“हमने ईरान की नौसेना, वायुसेना, एयर डिफेंस और रडार सिस्टम को खत्म कर दिया है, और उनके शीर्ष नेतृत्व को भी लगभग समाप्त कर दिया है।”

इसके साथ ही उन्होंने साफ कहा,
“हम अब नाटो देशों की सहायता न तो चाहते हैं और न ही जरूरत है-हमें कभी थी भी नहीं।”

एशियाई सहयोगियों पर भी बयान

ट्रंप ने जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को लेकर भी यही रुख दोहराया। उन्होंने कहा,
“हमें किसी की मदद की जरूरत नहीं है।”

ब्रिटेन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने युद्धपोत और माइनस्वीपर भेजने का अनुरोध किया था, लेकिन जवाब उम्मीद के मुताबिक नहीं मिला।

उन्होंने आगे कहा,
“मैंने बाद में कहा कि अब उनकी जरूरत नहीं है। मुझे मदद शुरुआत में चाहिए थी, जीत के बाद नहीं।”

नाटो और ईरान मुद्दा

गौरतलब है कि 1949 में स्थापित नाटो सामूहिक रक्षा के सिद्धांत पर काम करता है, जिसमें अमेरिका सबसे बड़ा सैन्य और वित्तीय योगदानकर्ता है। रक्षा खर्च और जिम्मेदारी के बंटवारे को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं।

वहीं, ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अमेरिका की मध्य-पूर्व नीति का अहम मुद्दा रहा है। अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने 2015 के ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया था, यह कहते हुए कि यह समझौता ईरान को स्थायी रूप से परमाणु हथियार बनाने से नहीं रोकता।

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