नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट संकट और आयात में कमी के बीच देश में एलपीजी सप्लाई को लेकर नई रणनीति पर काम किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियां अब 14.2 किलोग्राम की जगह 10 किलोग्राम गैस वाले सिलिंडर देने पर विचार कर रही हैं। इस प्रस्ताव पर फिलहाल विचार चल रहा है। इस प्रस्ताव का मकसद सीमित स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा घरों तक पहुंचाना है।
कितने दिन चलेगा 10 किलो सिलिंडर?
कंपनियों के अनुमान के मुताबिक, जहां 14.2 किलो का सिलिंडर आमतौर पर 35-40 दिन चलता है, वहीं 10 किलो का सिलिंडर एक सामान्य परिवार के लिए करीब एक महीने तक चल सकता है। इससे सीमित स्टॉक को ज्यादा घरों तक पहुंचाना संभव होगा।
कीमत में कितनी होगी कटौती?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिलिंडर पर नया स्टिकर लगाया जाएगा, जिसमें कम गैस होने की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, कीमतों में भी उसी अनुपात में कटौती की जाएगी। बॉटलिंग प्लांट्स को अपने वन मापने वाले सिस्टम को फिर से कैलिब्रेट करना होगा, और इसके लिए कुछ नियामक मंजूरियों की भी जरूरत पड़ सकती है।
आने वाले समय में क्या हो सकते हैं हालात?
कंपनियों को आशंका है कि इस बदलाव से उपभोक्ताओं में भ्रम या विरोध की स्थिति बन सकती है, खासकर चुनावी माहौल में। वहीं, सप्लाई और बिगड़ने की संभावना के चलते कंपनियों के पास विकल्प सीमित होते जा रहे हैं।
सप्लाई पर क्यों बढ़ा दबाव?
खाड़ी क्षेत्र से कोई नई खेप रास्ते में नहीं है। और पिछले हफ्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से केवल दो जहाज भारत आए, जो कुल 92,700 टन एलपीजी लाए। यह देश की एक दिन की खपत के बराबर है।
भारत के 93,500 टन के दैनिक LPG इस्तेमाल में से 80,400 टन, यानी 86%, घरों में इस्तेमाल होता है। मार्च के पहले पखवाड़े में, कुल खपत में 17% की गिरावट आई, जिससे पता चलता है कि इसका असर कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूजर्स से आगे बढ़ा है।





