हिंदू धर्म में कन्या पूजन का विशेष महत्व माना गया है। पुराणों के अनुसार कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। उनकी पूजा करने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और जीवन के दुख-दर्द दूर होते हैं। आमतौर पर नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन किया जाता है, लेकिन इसके अलावा भी कई ऐसे अवसर हैं जब यह पूजा की जा सकती है।
इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की अष्टमी 26 मार्च और नवमी 27 मार्च को पड़ रही है। हालांकि, नवरात्रि के अलावा भी कुछ खास मौकों पर कन्या पूजन किया जा सकता है।
इन मौकों पर भी कर सकते हैं कन्या पूजन:
विशेष मांगलिक कार्य: विवाह, गृह प्रवेश या संतान जन्म जैसे शुभ अवसरों पर कन्या पूजन करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
तीर्थ यात्रा के बाद: किसी धार्मिक यात्रा से सकुशल लौटने पर भगवान के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए कन्या पूजन किया जाता है। खासकर वैष्णो देवी, नैना देवी या ज्वाला देवी जैसे सिद्ध शक्तिपीठों के दर्शन से लौटने के बाद ये परंपरा निभाई जाती है।
मासिक दुर्गा अष्टमी: कई भक्त हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी या नवमी को कन्याओं को भोजन कराते हैं या प्रसाद बांटते हैं।
मनोकामना पूर्ण होने पर: जब किसी भक्त की कोई विशेष मनोकामना पूरी होती है, तो वे आभार स्वरूप कन्याओं को भोजन कराते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं।
क्यों किया जाता है कन्या पूजन?
कन्या पूजन से व्यक्ति में सेवा, करुणा और विनम्रता का भाव बढ़ता है। मान्यता है कि जिस घर में कन्याओं का सम्मान होता है, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
कैसे करें कन्या पूजन?
2-10 साल तक की कन्या को घर पर भोजन का निमंत्रण दें। कन्याओं को स्वच्छ जगह बिठाकर सभी के पैरों को दूध से भरे थाल या थाली में रखकर अपने हाथों से उनके पैर धोने चाहिए और पैर छूकर आशीष लेना चाहिए। उसके बाद माथे पर अक्षत, फूल और कुमकुम लगाना चाहिए। फिर भोजन कराएं। भोजन के बाद कन्याओं को अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा, उपहार दें और उनके पुनः पैर छूकर आशीष लें।





