ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। ईरान ने दो भारतीय जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। ये दोनों जहाज बुधवार रात से गुरुवार सुबह के बीच इस समुद्री मार्ग से ट्रांजिट कर रहे हैं।
युद्ध शुरू होने के बाद से ज्यादातर जहाज वहां फंसे हुए हैं और ट्रैफिक लगभग बंद हो गया है। ऐसे में भारत में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही थी। भारतीय जहाजों को मिली इस अनुमति से देश में तेल आपूर्ति को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दो भारतीय जहाजों (भारतीय फ्लैग वाले) को ईरान ने पास होने दिया। इससे पहले एक लाइबेरियन फ्लैग वाला टैंकर, जो सऊदी क्रूड ऑयल ले जा रहा था और जिसका कैप्टन भारतीय था, दो दिन पहले होर्मुज से गुजरा और मुंबई पोर्ट पर पहुंच गया। ये भारत जाने वाला पहला जहाज था जो युद्ध के बाद सुरक्षित ट्रांजिट कर पाया।
ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका नियंत्रण है। IRGC के कमांडर रियर एडमिरल अलीरेजा तंगसीरी ने कहा, “कोई भी जहाज होर्मुज से गुजरना चाहता है तो ईरान से परमिशन लेनी होगी, वरना अटैक का सामना करना पड़ेगा.” उन्होंने एक्सप्रेस रोम और मयूरी नारे नाम के दो जहाजों का जिक्र करते हुए कहा कि इन जहाजों ने चेतावनी को नजरअंदाज किया और अटैक का शिकार हुए।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल इंपोर्टर है और ज्यादातर क्रूड मिडिल ईस्ट से आता है, जो होर्मुज से गुजरता है। युद्ध शुरू होने (28 फरवरी) से पहले ही कई भारतीय जहाज फंस गए थे। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के मुताबिक, 28 से 37 भारतीय फ्लैग वाले जहाज वहां थे, जिनमें 1000 से ज्यादा भारतीय सीफेयरर्स थे। ईरान ने अमेरिका, इजरायल और यूरोप के जहाजों पर सख्ती बरती है, लेकिन भारत जैसे गैर-पश्चिमी देशों को छूट दी है। ये डिप्लोमेटिक सफलता है।
बताया जा रहा है कि भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से बातचीत की थी। सूत्रों के मुताबिक, इसी कूटनीतिक बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय टैंकरों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी है।





