सोना निवेश के रूप में हमेशा से लोगों की पहली पसंद रहा है. इसे लोग सुरक्षित और भरोसेमंद मानकर लंबे समय तक संभालकर रखते हैं. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड ऐसा निवेश नहीं है जिसे हमेशा के लिए पकड़े रखा जाए. यह न तो नियमित आय देता है और न ही किसी बिजनेस की तरह बढ़ता है. इसलिए सही समय पर इससे बाहर निकलना भी उतना ही जरूरी है जितना इसमें निवेश करना.
जब पोर्टफोलियो में गोल्ड का हिस्सा ज्यादा हो जाए
अक्सर देखा जाता है कि सोने की कीमत बढ़ने पर इसका हिस्सा आपके कुल निवेश में तेजी से बढ़ जाता है. मान लीजिए आपने 10 फीसदी गोल्ड में निवेश किया था, लेकिन कीमत बढ़ने से यह 20 फीसदी या उससे ज्यादा हो गया. ऐसे में आपका पोर्टफोलियो असंतुलित हो जाता है. इस स्थिति में थोड़ा-बहुत गोल्ड बेचकर बैलेंस बनाना समझदारी होती है, ताकि जोखिम कम किया जा सके.
जब कीमतें तेजी से ऊपर जाएं
सोने की कीमतें अक्सर वैश्विक घटनाओं, डर या महंगाई के कारण अचानक बढ़ जाती हैं. अगर कम समय में तेजी से उछाल दिखे, तो यह संकेत हो सकता है कि कीमतें भावनाओं के आधार पर बढ़ रही हैं. ऐसे समय में थोड़ा-थोड़ा गोल्ड बेचकर मुनाफा लेना बेहतर रहता है. सही टॉप पकड़ने की कोशिश करने के बजाय धीरे-धीरे एग्जिट करना ज्यादा सुरक्षित तरीका माना जाता है.
गोल्ड बेहतरीन निवेश! मगर इससे कब वापस निकलें? एक्सपर्ट ने बताई सही रणनीति
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