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जर्मनी और रूस का लगा पैसा, ईरान के लिए खजाने की चाबी है ये न्यूक्लियर प्लांट, देश को अंधेरे में डुबो सकता है

ईरान की अर्ध-सरकारी मीडिया तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, शनिवार सुबह यूएस-इजरायली हमले में ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट को निशाना बनाया गया, जिसमें एक प्रोजेक्टाइल प्लांट के पास स्थित जमीन पर गिरा. पेट्रोकेमिकल्स हब ‘महशहर’ पर भी हमला हुआ, जिसमें पांच लोग घायल हो गए. न्यूज एजेंसी ने बताया कि इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई और प्लांट से जुड़ी इमारतों को नुकसान हुआ. इसमें यह भी कहा गया कि पावर प्लांट के मुख्य हिस्से को कोई नुकसान नहीं हुआ है और ऑपरेशन पर कोई असर नहीं पड़ा है.
न्यूज एजेंसी ने दावा किया कि युद्ध शुरू होने के बाद से पावर प्लांट पर यह चौथा हमला था. हालांकि अमेरिका और इजरायल ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है. वहीं, ईरानी पेट्रोकेमिकल्स हब पर हुई एयर स्ट्राइक में पांच लोगों के घायल होने की खबर है. ईरानी मीडिया के मुताबिक, कुछ समय पहले दक्षिण-पश्चिम ईरान में पेट्रोकेमिकल हब पर इजरायली हवाई हमले हुए थे. इजरायली मीडिया हाउस द टाइम्स ऑफ इजरायल ने सुरक्षा सूत्रों के हवाले से पुष्टि की कि हमले इजरायली एयर फोर्स ने किए थे.
फार्स न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट है कि खुजेस्तान प्रांत में महशहर पेट्रोकेमिकल स्पेशल जोन की कई जगहों पर हमले हुए. खुजेस्तान प्रांत के डिप्टी गवर्नर वलियोल्लाह हयाती ने फार्स को बताया कि तीन कंपनियों पर इसका असर पड़ा, जबकि तस्नीम न्यूज एजेंसी ने उनके हवाले से कहा कि “नुकसान कितना हुआ है, यह अभी पता नहीं है.” उन्होंने आगे कहा कि हमलों में पांच लोग घायल हुए हैं, लेकिन यह तुरंत साफ नहीं है कि कोई मौत हुई है या नहीं. पिछले हफ्ते ही ‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि देश राजनीतिक नेतृत्व ने आईडीएफ को ईरान में “आर्थिक ठिकानों” पर हमला करने का निर्देश दिया, जिसका मकसद शासन को भारी आर्थिक तौर पर कमजोर करना था.

बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट के बारे में
यह मिडिल ईस्ट का सबसे पहला सिविलियन न्यूक्लियर प्लांट है. बुशहर न्यूक्लियर प्लांट ईरान में फारस की खाडी के किनारे पर मौजूद है. इस प्लांट का निर्माण पहले जर्मनी ने शुरू किया था. बाद में इसे रूस की कंपनी ने पूरा किया. यह ईरान का इकलौता एक्टिव न्यूक्लियर पावर प्लांट है. यह एक हजार मेगावाट तक बिजली पैदा करता है. इससे ईरान के लाखों घरों को बिजली दी जाती है. युद्ध के बीच इस प्लांट पर हमले का बहुत भारी खतरा है. इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी ने रेडियोएक्टिव लीक की कड़ी चेतावनी दी है. ईरान के लिए इस पावर हाउस की अहमियत बहुत ही ज्यादा है.

ईरान के लिए पावर का सबसे बड़ा सोर्स है बुशहर प्लांट
बुशहर न्यूक्लियर प्लांट ईरान के लिए एक बहुत बड़ा गेम चेंजर है. यह एक हजार मेगावाट तक पावर जनरेट करने में सक्षम है. इससे ईरान के लाखों घरों और इंडस्ट्री में बिजली सप्लाई होती है. इस प्लांट की मदद से ईरान बहुत सारा तेल और गैस बचाता है. इस बचे हुए तेल को एक्सपोर्ट करके ईरान भारी इनकम करता है. यह ईरान की पॉलिटिकल और स्ट्रेटेजिक पावर का बहुत बड़ा सिंबल है.
रूस और जर्मनी से बुशहर न्यूक्लियर प्लांट का कनेक्शन
बुशहर प्लांट की शुरुआत 1970 के दशक में की गई थी. उस समय जर्मनी की सीमेंस कंपनी ने इसका काम शुरू किया था. 1979 की ईरानी क्रांति के बाद जर्मन कंपनी वापस लौट गई थी. इसके बाद 1995 में ईरान ने रूस के साथ बड़ा एग्रीमेंट किया. रूस की रोसाटोम कंपनी ने इस प्लांट को पूरी तरह तैयार किया. यह 2011 से काम कर रहा है और रूस इसे चलाता है.

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