केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन फ्यूल (एविएशन टरबाइन फ्यूल- ATF) से जुड़े टैक्स और निर्यात नियमों में बड़ा बदलाव किया है. पेट्रोल पर एक्साइड ड्यूटी 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर से घटाकर एक्साइड ड्यूटी शून्य कर दिया है. लेकिन इससे रिटेल दामों में कोई कटौती नहीं होगी. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचनाओं के मुताबिक ये सभी नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं. सरकार का यह कदम ऊर्जा क्षेत्र में टैक्स स्ट्रक्चर को तर्कसंगत बनाने और निर्यात से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट करने के उद्देश्य से उठाया गया है.
सरकार ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क नियम, 2017 में संशोधन करते हुए पेट्रोल, हाई-स्पीड डीजल (HSD) और ATF पर नियम 18 और 19 के प्रावधानों को लागू न करने का फैसला किया है. हालांकि, इस बदलाव से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (PSUs) को राहत दी गई है. ये कंपनियां अगर नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका को ईंधन निर्यात करती हैं, तो उन पर पुराने नियम ही लागू रहेंगे और उन्हें पहले की तरह छूट मिलती रहेगी.
क्यों किया सरकार ने ये बदलाव?
सरकार ने निर्यात के लिए भेजे जाने वाले हाई-स्पीड डीजल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) की दर 18.5 रुपये प्रति लीटर तय की है. वहीं, पेट्रोल (मोटर स्पिरिट) के निर्यात पर इस विशेष शुल्क को शून्य रखा गया है, जिससे पेट्रोल निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है. इसके अलावा, हाई-स्पीड डीजल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 3 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है. सरकार ने निर्यात और विदेशी विमानों को ईंधन आपूर्ति के मामले में भी राहत दी है. अब जब पेट्रोल, डीजल या ATF का निर्यात किया जाएगा या विदेशी एयरलाइंस को ईंधन के रूप में दिया जाएगा, तो उस पर बुनियादी उत्पाद शुल्क (Basic Excise Duty) और कृषि उपकर (AIDC) नहीं लगेगा. इससे अंतरराष्ट्रीय एविएशन सेक्टर को राहत मिलने की उम्मीद है.
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एविएशन फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी
एविएशन ईंधन (ATF) के मामले में सरकार ने विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को बढ़ाकर 50 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. हालांकि, जनहित को ध्यान में रखते हुए एक अन्य अधिसूचना के जरिए इसमें राहत दी गई है, जिससे प्रभावी दर घटकर 29.5 रुपये प्रति लीटर रह गई है. इसके साथ ही निर्यात किए जाने वाले ATF को कुछ शर्तों के तहत इस विशेष शुल्क से पूरी तरह छूट देने का प्रावधान भी किया गया है. आयात किए जाने वाले ATF पर भी सरकार ने राहत दी है. उस अतिरिक्त सीमा शुल्क (Customs Duty) को हटा दिया गया है, जो विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क के बराबर होता था.
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इस फैसले से आयातित ATF की लागत कम हो सकती है और एयरलाइंस सेक्टर को कुछ राहत मिल सकती है. सरकार के इन फैसलों से तेल और एविएशन सेक्टर में टैक्स ढांचे में स्पष्टता आएगी और निर्यात को बढ़ावा मिलने की संभावना है. हालांकि, इन बदलावों का अंतिम असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और बाजार की स्थिति पर भी निर्भर करेगा.
एक्साइज ड्यूटी कम होने से सीधा कंपनियों को फायदा
जब सरकार पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करती है, तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) का खर्च घट जाता है. अगर पेट्रोल-डीजल के दाम (पंप प्राइस) तुरंत कम नहीं किए जाते, तो यह फायदा सीधे कंपनियों को मिलता है. खर्च कम होने से कंपनियों का मुनाफा (मार्जिन) बढ़ता है, जिससे उनकी कमाई और कैश फ्लो बेहतर होता है और बैलेंस शीट मजबूत होती है. पहले जब कच्चा तेल $120 प्रति बैरल तक पहुंच गया था, तब कंपनियों को पेट्रोल-डीजल बेचने पर घाटा हो रहा था, इसलिए कई ब्रोकरेज ने उनके स्टॉक्स को डाउनग्रेड किया था. अब ड्यूटी कम होने से उन्हें राहत मिलती है.




