बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में साइबर ठगी का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां 13 साल के एक छात्र की सूझबूझ से उसका परिवार बड़े फ्रॉड का शिकार होने से बच गया। ठगों ने खुद को NIA अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया और परिवार को घंटों तक धमकाते रहे।
‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डराने की कोशिश
जानकारी के अनुसार, साइबर अपराधियों ने बेकरी मालिक संजय सक्सेना और उनकी पत्नी को फोन कर बताया कि उनका नंबर आतंकवादी गतिविधियों और 300 करोड़ रुपये के फ्रॉड से जुड़ा हुआ है। आरोपियों ने उन्हें वीडियो कॉल पर बनाए रखा और करीब 9 घंटे तक लगातार दबाव बनाते रहे।
बेटे को हुआ शक
आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले तन्मय ने बताया:
“मुझे पक्का यकीन था कि यह डिजिटल अरेस्ट का मामला है, क्योंकि मैंने कुछ दिन पहले ही इस बारे में खबर पढ़ी थी। मेरा शक तब और बढ़ गया जब आरोपियों ने हमारी प्रॉपर्टी, गहनों और घर की के बारे में जानकारी मांगी।”
गिरफ्तारी वारंट तक भेजा
तन्मय के पिता संजय सक्सेना ने बताया:
“मेरी पत्नी और मैं इतने डर गए थे कि हमने अपनी सारी बैंक डिटेल्स दे दीं और अपनी कीमती चीजों और प्रॉपर्टी के बारे में भी बता दिया। हम डर के मारे सुन्न हो गए थे। यह मेरा बेटा ही था जिसने बार-बार मुझसे कॉल काटने को कहा।”
साइबर ठगों ने भरोसा दिलाने के लिए एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट भी भेजा था।
बेटे की सलाह से बची रकम
तन्मय ने आगे बताया:
“जब मेरे माता-पिता हिचकिचाए तो मैंने अपने पिता से कहा कि कम से कम थोड़ी देर के लिए फोन को फ्लाइट मोड में डाल दें।” इसके बाद परिवार ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
बरेली जोन के ADG रमित शर्मा ने बताया कि तन्मय साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी खबरों को ध्यान से पढ़ता है, जिससे उसे समय रहते स्थिति समझ में आ गई।
वहीं SSP अनुराग आर्य ने बताया कि, इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है और बेकरी मालिक के बैंक अकाउंट को फिलहाल फ्रीज कर दिया गया है, ताकि पैसे सुरक्षित रह सकें। हम जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लेंगे।





