पश्चिम एशिया में युद्ध से सिर्फ अमेरिका, इजरायल और ईरान ही प्रभावित नहीं हो रहे हैं, बल्कि पूरी दुनिया पर इसका असर पड़ रहा है. तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने से ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस की स्थिति पैदा हो गई है. इससे उथल-पुथल की स्थिति बन चुकी है. दुनिया के तमाम देश वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करने लगे हैं. दूसरी तरफ, अब जंग रुकवाने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं. पाकिस्तान इसमें अहम भूमिका निभाने के लिए छटपटा रहा है. आर्मी चीफ आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को चौधरी बनने की इस कदर चाहत है कि वे दाल-भात में मूसलचंद बने फिर रहे हैं. इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए पाकिस्तान ने कथित इस्लामिक NATO के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को इस्लामाबाद आमंत्रित किया है. इसका मकसद ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध को रुकवाना बताया जा रहा है. इस उद्देश्य के साथ तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्री पाकिस्तान पहुंचे हैं. अमेरिका और इजरायल के प्रतिनिधि इसमें शामिल होंगे या नहीं यह तय नहीं है. दूसरा सवाल यह भी है कि इन दोनों देशों की एक्टिव भागीदारी के बिना क्या ईरान में जंग खत्म हो जाएगी.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल का केंद्र बनने जा रहा है. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे टकराव को कम करने के उद्देश्य से उच्चस्तरीय वार्ता आयोजित की जा रही है. इन वार्ताओं में क्षेत्र के कई प्रमुख देशों के शीर्ष राजनयिक शामिल होंगे, जिससे शांति और स्थिरता की दिशा में ठोस कदम उठाने की उम्मीद जताई जा रही है. पाकिस्तान सरकार के अनुसार, दो दिवसीय इस वार्ता में Saudi Arabia, Turkey और Egypt के विदेश मंत्री भाग लेंगे. इन देशों की भागीदारी इस पहल को क्षेत्रीय स्तर पर व्यापक समर्थन मिलने का संकेत देती है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार इन चर्चाओं का नेतृत्व करेंगे. वार्ता का मुख्य फोकस क्षेत्र में तनाव कम करना और व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना रहेगा.
ईरान जंग के बीच पाकिस्तान में इस्लामिक NATO की जुटान, अमेरिका-इजरायल के खिलाफ मोर्चेबंदी! क्या है प्लान
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