ईरान युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र के एयरपोर्ट दुबई, अबू धाबी और दोहा बुरी तरह प्रभावित हो गए हैं. ये एयरपोर्ट दुनिया भर के लंबी दूरी के यात्रियों और कार्गो के लिए जरूरी रोल निभाते हैं. एक स्टॉप में यात्री दूर-दराज के शहरों के बीच आसानी से पहुंच जाते थे और हल्का सामान भी तेजी से दूसरी जगह पर पहुंचता था. लेकिन अब जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण ट्रांजिट ट्रैफिक ठप हो गया है. गल्फ हब दुनियाभर के कुल उड़ान वॉल्यूम का बड़ा हिस्सा संभालते थे. तनाव शुरू होने के बाद से इन हबों पर भारी दबाव पड़ा है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एविएशन एनालिटिक्स फर्म सिरियम (Cirium) के अनुसार, फरवरी 28 से अब तक मध्य पूर्व में 30,000 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिल हो चुकी हैं. बीबीसी की रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हुई है. ईरान और इजराइल के शुरुआती दिनों में दुबई, अबू धाबी और दोहा के एयरपोर्ट पर सैकड़ों हजार यात्री फंस गए थे. कई यात्री सिर्फ ट्रांजिट के लिए आए थे, लेकिन उड़ानें रद्द होने से वे घंटों या दिनों तक एयरपोर्ट पर अटक गए. गल्फ एयरलाइंस ने सीमित संख्या में उड़ानें शुरू की हैं, लेकिन शेड्यूल अभी भी अनिश्चित और बाधित है. दुबई और अबू धाबी कुछ हद तक सामान्य होने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन दोहा अभी भी बुरी तरह प्रभावित है.
जेट फ्यूल की कीमतों में बढ़त
जेट फ्यूल की कीमतें आसमान छू रही हैं. संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित हुआ, जिससे गल्फ रिफाइनरियों से ईंधन की आपूर्ति बाधित हुई है. गल्फ सेक्टर यूरोप के जेट फ्यूल आयात का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा रखता है. ईंधन की कीमतें संघर्ष शुरू होने के बाद दोगुनी हो गई हैं. इससे एयरलाइंस पर भारी दबाव बढ़ गया है. कई एयरलाइंस ने उड़ानें कम कर दी हैं. लंबे रूट पर उड़ानें लेने के लिए एयरलाइंस को अब सिंगापुर या टोक्यो जैसे ऑप्शनल हब का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. इससे यात्रा का समय बढ़ रहा है और ईंधन की खपत भी ज्यादा हो रही है.
ईरान वॉर की वजह से महंगी हुई हवाई यात्रा, कार्गो और फ्लाइट टिकट दोनों के दाम में लगी आग, 70% तक आया उछाल
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