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आपकी छोटी-सी गलती और बैंक अकाउंट खाली: AI के जरिए ठगी का नया तरीका, बिहार पुलिस ने बताया बचाव का उपाय

पटना: अगर कोई अनजान व्यक्ति आपसे फोन लेकर मदद मांगता है, तो सतर्क हो जाएं। साइबर ठग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर लोगों की आवाज और चेहरा कॉपी कर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। बिहार पुलिस ने ऐसे मामलों के सामने आने के बाद आम लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है।

कैसे हो रही है ठगी

ठग सार्वजनिक जगहों पर लोगों से मदद मांगते हैं। वे फोन हैंग होने या कॉल न लगने का बहाना बनाकर अपना मोबाइल थमा देते हैं। इस दौरान उनके फोन में पहले से ही वॉयस या वीडियो कॉल चालू रहता है, जिससे सामने वाले व्यक्ति की आवाज और चेहरा रिकॉर्ड हो जाता है।

बाद में इस डेटा का इस्तेमाल कर फर्जी प्रोफाइल तैयार की जाती है और उसी के जरिए ठगी को अंजाम दिया जाता है।

फ्रॉड कॉल और वेरिफिकेशन में हो रहा इस्तेमाल

AI की मदद से बनाए गए नकली प्रोफाइल से ठग किसी के रिश्तेदारों या जानकारों को कॉल कर पैसों की मांग करते हैं। इसके अलावा, कई सरकारी और निजी सेवाओं में होने वाले डिजिटल वेरिफिकेशन को भी इस तकनीक से बायपास किया जा सकता है।

बिहार पुलिस ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी अंजान व्यक्ति का फोन इस्तेमाल करने से बचें।

बढ़ रहे हैं ऐसे मामले

साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, AI टूल्स की मदद से अब 10-15 मिनट में किसी की भी आवाज और चेहरा हूबहू तैयार किया जा सकता है। यही वजह है कि डीपफेक से जुड़ी ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि, इन्हें पहचानने के लिए नए सॉफ्टवेयर बनाए जा रहे हैं, लेकिन सबसे जरूरी आम लोगों की सतर्कता है।

बिहार पुलिस की अपील

सार्वजनिक जगह पर अंजान का मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से बचें
अजनबी के फोन पर अपना फेस या वॉयस अनलॉक न करें
सोशल मीडिया पर फोटो-वीडियो शेयर करने से पहले प्राइवेसी सेटिंग्स चेक करें
अज्ञात नंबर से आपात स्थिति वाले कॉल पर तुरंत भरोसा न करें
फेक वीडियो कॉल की पहचान के लिए उसके लाइव मोशन को चेक करें
ठगी का शिकार होने पर 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें

सावधानी ही साइबर ठगी से बचने का सबसे बड़ा तरीका है।

 

 

 

 

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