छत्तीसगढ़

स्थानीय राखियों की खरीद से महिला उद्यमिता को मिला संबल

रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर कोरिया जिले में महिला स्व-सहायता समूहों की मेहनत और स्थानीय उद्यमिता को नई पहचान मिली। कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने बैकुंठपुर बाजार पहुंचकर स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार की गई राखियां खरीदीं और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने धान से निर्मित आकर्षक राखियों की विशेष सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाने से महिला स्व-सहायता समूहों को बेहतर बाजार मिलेगा और उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी।
कलेक्टर श्रीमती यादव ने समूह की महिलाओं से संवाद करते हुए उनके हुनर, नवाचार और मेहनत की सराहना की। उन्होंने विभिन्न डिजाइनों और पारंपरिक कला से सुसज्जित राखियों का अवलोकन किया तथा कहा कि स्व-सहायता समूहों की महिलाएं अपने कौशल के बल पर न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर रही हैं, बल्कि स्थानीय उत्पादों को भी नई पहचान दिलाने का उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही राखियां महिला सशक्तिकरण, स्वदेशी सोच और स्थानीय उद्यमिता का सशक्त प्रतीक हैं।
कलेक्टर ने जिलेवासियों से अपील की कि वे रक्षाबंधन सहित अन्य पर्व-त्योहारों पर स्थानीय कारीगरों और स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों की खरीदारी को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि जब स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा, तब महिलाओं की आय में वृद्धि होगी और उनके आत्मनिर्भर बनने के प्रयासों को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पाद खरीदना केवल एक वस्तु खरीदना नहीं, बल्कि किसी महिला के हुनर, परिश्रम और आत्मनिर्भर बनने के संकल्प को सम्मान देना है। समूहों के उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि ग्रामीण महिलाओं की आजीविका के नए अवसर सृजित हो सकें और उनके उत्पादों को राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।
इस अवसर पर स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। महिलाओं ने बताया कि राखियों के निर्माण में स्थानीय सामग्री, धान और पारंपरिक हस्तशिल्प कला का उपयोग किया गया है। रंग-बिरंगी आकर्षक डिजाइनों के साथ तैयार की गई धान की राखियां लोगों को विशेष रूप से पसंद आ रही हैं। रक्षाबंधन पर्व पर स्थानीय राखियों की बढ़ती मांग से समूह की महिलाओं में उत्साह है और उन्हें बेहतर आय की उम्मीद भी जगी है।
स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने की यह पहल महिला स्व-सहायता समूहों के आर्थिक सशक्तिकरण, ग्रामीण उद्यमिता के विस्तार और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है।

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