अगर आपकी या आपके जीवनसाथी की सालाना इन 10 लाख रुपये से अधिक है और इसके बावजूद आपके खाते में एलपीजी (LPG) सब्सिडी आ रही है, तो आपको नियमों की जानकारी जरूर होनी चाहिए. सरकार ने आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों को सब्सिडी के दायरे से बाहर रखने के लिए कई साल पहले आय सीमा तय की थी और अब डिजिटल तकनीक के जरिए इसकी निगरानी पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो गई है.
सरकार ने 2016 में यह व्यवस्था लागू की थी कि जिन परिवारों की आय तय सीमा से ज्यादा है, उन्हें रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी का फायदा नहीं मिलेगा. शुरुआत में कंज्यूमर से सेल्फ डिक्लेरेशन ली जाती थी, लेकिन अब डेटा बेस्ड निगरानी व्यवस्था को प्रायोरिटी दी जा रही है.
आधार, पैन और बैंक डिटेल से आसान हुई जांच
मौजूदा समय में ज्यादातर एलपीजी उपभोक्ताओं के आधार, पैन, बैंक खाते और गैस कनेक्शन की जानकारी आपस में जुड़ी हुई है. इससे जुड़ी एजेंसियों के लिए एलिजिबल और इनएलिजिबल लाभार्थियों की पहचान करना काफी आसान हो गया है. सरकार अलग-अलग डेटाबेस के जरिए इनकम संबंधी सूचनाओं का मिलान कर सकती है.




