ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर को लेकर पाकिस्तान खुद को शांति दूत के रूप में पेश कर रहा है. शांति वार्ता की मेजबानी कर वह अपनी छाती ठोक रहा है. लेकिन, सच्चाई कुछ अलग है. भारत ने काफी पहले जो बात कही थी वह आज सही साबित हो रही है. आखिरकार पाकिस्तान इस पूरे मामले में दलाल ही बनकर उभरा है. यह हम नहीं बल्कि ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट इसका खुलासा हुआ है.
दरअसल, ईरान जंग में सीजफायर कराने की पाकिस्तान की कोशिश को भारत ने काफी पहले दलाली करार दिया था. अब फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में भारत के इस दावे पर मुहर लग गई है. रिपोर्ट के मुताबिक असल में व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान को दबाव डालकर इस्तेमाल किया. इस्लामाबाद कोई न्यूट्रल ब्रोकर नहीं था. वह सिर्फ अमेरिका का सुविधाजनक मैसेंजर बनकर रह गया. रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका ने पाकिस्तान पर जोर डाला कि वह वाशिंगटन का प्रस्ताव तेहरान तक पहुंचाए. पाकिस्तान को सक्रिय भूमिका नहीं दी गई, बल्कि सिर्फ एक चैनल बनाया गया. अमेरिका को लगा कि ईरान मुस्लिम पड़ोसी देश के जरिए आने वाले ऑफर को ज्यादा आसानी से मान लेगा. यही वजह थी कि पाकिस्तान को चुना गया.
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सबसे पहले दो सप्ताह के सीजफायर का सार्वजनिक प्रस्ताव लेकर आए. लेकिन असल खेल सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने खेला. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वांस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से लगातार बातें कीं. शरीफ दर्शक बनकर रह गए. शरीफ की जल्दबाजी ने भी सच्चाई उजागर कर दी. उन्होंने सीजफायर को अपनी पहल बताते हुए एक्स पर पोस्ट किया, लेकिन गलती से उसमें ‘ड्राफ्ट-पाकिस्तान्स पीएम मैसेज ऑन एक्स’ लिखा रह गया. बाद में एडिट किया गया, लेकिन स्क्रीनशॉट वायरल हो गए. साफ था कि मैसेज किसी और ने लिखकर दिया था. पाकिस्तान सिर्फ कॉपी-पेस्ट कर रहा था.
भारत की बात हो गई सच, ईरान जंग में दलाल ही निकला पाकिस्तान, अमेरिका ने बनाया रट्टू तोता
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