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स्कूली बच्चों को उनकी ही भाषा में मिलेगी डिजिटल किताबें

छात्रों को उनकी ही भाषा में पढ़ने का मौका मिले, इस दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. मोदी सरकार ने फैसला लिया है कि  सभी स्कूली और उच्च शिक्षा की पुस्तके और सभी पाठ्य सामग्री डिजीटली सभी भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगी. संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल सभी भारतीय भाषाओं में डिजिटली ये छात्रों को उपलब्ध करवाई जाएगी.

शिक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को यूजीसी, एआईसीटीई. एनसीईआरटी, एनआईओएस, इग्नू के साथ साथ आईआईटी और एनआईटी को भी निर्देश जारी किया है कि अगले तीन सालों के भीतर ये काम पूरा हो जाना चाहिए. तीन सालों के भीतर इन सभी संस्थानों द्वारा चलाए जा रही स्कूली और उच्च शिक्षा की पाठ्य पुस्तके और पाठ्य सामग्री भारतीय भाषाओं में उपलब्ध रहेगी. केंद्र सरकार ने यूजीसी, एआईसीटीई और स्कूली शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि वो देश के सभी स्कूलों और विश्वविद्यालयों से भी इस बारे में बात कर अगले तीन सालों में ये करना सुनिश्चित करें.

दरअसल नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षा के हर स्तर पर बहु-भाषा को जोर देने की सिफारिश की गई है. जिससे छात्र-छात्राओं को अपनी भाषाओं में पढ़ने का मौका मिले और वो ज्यादा बेहतर नतीजे दे सकें. अगर छात्र-छात्राएं अपनी ही भाषा में पढ़ेंगे तो जाहिर बात है, वो ज्यादा बेहतर सोच सकेंगे और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे. शिक्षा नीति में ये भी कहा गया है कि भारत की बहु-भाषाएं देश की ताकत हैं, जिसका देश के शैक्षणिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जाना चाहिए. भारत सरकार ने पहले से भी इस दिशा में कदम उठाए हैं. देश में पिछले दो सालों से मेडिकल, लॉ, यूजी, पीजी आदि में अनुवादिनी एआई एप के जरिए ट्रांस्लेशन का काम चल रहा है.

बच्चों को मिलेगा लाभ
भारत सरकार के इस फैसले का आने वाले कुछ सालों के बाद बहुत सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकता है. अक्सर देखने में मिलता है कि भाषाई परेशानियों के कारण भारत जैसे विशाल देश के दूर-दराज के इलाके के बच्चों को अनेक परेशानियां होती हैं. वर्तमान प्रतियोगी युग में अनेक बच्चे अपनी भाषाई बाधाओं के कारण खुद को पहले ही पीछे पाते हैं. लेकिन अब जब उन्हें अपनी ही भाषाओं में पुस्तके और पाढ्य सामग्री मिलेगी, तो इसका उन्हें काफी फायदा मिलेगा.

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