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भारत को कब मिलेंगे 2 नए सुपर कंप्यूटर…..फ्रांसीसी कंपनी क्यों कर रही देरी पर देरी

केंद्र सरकार में पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरेन रिजिजू फ्रांस की एक कंपनी से खासा नाराज हैं. दरअसल यह कंपनी भारत के मौसम पूर्वानुमान संस्थानों को 2 सुपर कम्प्यूटर देने वाली थी, लेकिन इसकी सप्लाई में लगातार देरी पर देरी हुई जा रही है. इसे लेकर रिजिजू ने अपनी निराशा का इजहार करते हुए उम्मीद जताई कि फ्रांस सरकार इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कदम उठाएगी.

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने अपने संस्थानों- राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF) और भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) की कम्प्यूटिंग क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए पिछले साल फ्रांस की कंपनी एविडेन से 10 करोड़ डॉलर के दो सुपर कम्प्यूटर खरीदने का फैसला किया था. हालांकि ये सुपर कंप्यूटर अब तक नहीं मिल पाए हैं.

फ्रांस की कंपनी क्यों कर रही देरी?
इसे लेकर रिजिजू ने कहा, ‘मैं इसलिए ज्यादा निराश हूं, क्योंकि हमने दिसंबर का लक्ष्य तय किया था. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पहले ही सुपरकम्प्यूटर खरीदने को मंजूरी दे दी थी. हमारे पास मौसम की सटीक भविष्यवाणी के लिए केवल चार पेटाफ्लॉप हैं. हम 18 पेटाफ्लॉप की क्षमता स्थापित करना चाहते हैं.’ उन्होंने बताया कि फ्रांसीसी कंपनी कुछ वित्तीय संकट में फंस गई थी और चाहती थी कि सरकार उसकी सहायक कंपनी को कुछ भुगतान करे.

एडवांस पेमेंट पर क्यों हिचक रहे रिजिजू?
रिजिजू ने बताया कि इस देरी ने उन्हें काफी चिंतित कर दिया है, क्योंकि कंपनी की डेडलाइन बीत गई है. उन्होंने कहा, ‘लेकिन मुझे लगता है कि हम इसे जल्द ही हल कर लेंगे.’ उन्होंने कहा कि सरकार ‘कानूनी रूप से सही कदम’ उठाना चाहती है. केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘हम पैसा देने के लिए तैयार हैं, क्योंकि हम तुरंत यह मशीन चाहते हैं. दिक्कत यह है कि यह रकम कोई छोटी नहीं है. इसलिए अगर हम अभी भुगतान करते हैं और अगर कंपनी दिवालिया हो गई या कुछ होता है तो कौन बचाएगा.’

रिजिजू ने कहा कि सरकार सुपरकम्प्यूटर की आपूर्ति में तेजी लाने के लिए कुछ कदम उठा रही है लेकिन उन्होंने इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी. उन्होंने कहा, ‘लेकिन मैं उम्मीद करता हूं कि फ्रांस सरकार भी हस्तक्षेप करेगी क्योंकि हमारे बीच अच्छी समझ है और फ्रांस सरकार से बहुत अच्छे रिश्ते हैं. चूंकि यह अत्यधिक महंगा उपकरण है तो हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि लेनदेन उचित तरीके से हो.’

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